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हवन की आहुतियों और वैदिक मंत्रों के बीच पढ़े गए निकाह के कलमे

7 वर्ष पहले
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उदयपुर। सामूहिक विवाह सम्मेलन में रविवार को 51 जोड़े विवाह बंधन में बंधे। मंडप में अग्नि प्रज्जवलित करने तक वैदिक मंत्रों की गूंज उठ रही थी। हवन कुंड में आहुतियां देने से पहले उद्‌घोषणा हुई निकाह पढ़ाने की और मंच से निकाह के कलमे पढ़े जाने लगे। एक ओर 50 जोड़े वैदिक रीतियों से विवाह बंधन में बंध रहे थे, वहीं दूसरी ओर एक जोड़े का निकाह पढ़ा जा रहा था।
मौका था नारायण सेवा संस्थान की ओर से 23वें निशक्त सामूहिक विवाह सम्मेलन का। बड़ी स्थित सेवा महातीर्थ में आशीर्वाद समारोह के बाद दोपहर को अभिजित मुहूर्त में विवाह रस्में निभाई गईं। आयोजनों की शुरुआत तोरण की रस्म और वर-वधुओं के स्वागत से हुई। भगवान शिव की बारात भी निकाली गई। आयोजन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के साथ ही बिहार, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के जोड़े, उनके परिजन ओर भामाशाह शामिल थे। पंडित मनीष व हरीश शर्मा के आचार्यत्व में विवाह रस्में निभाई गई। आशीर्वाद समारोह में संस्थापक कैलाश मानव, अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने विचार रखे। सह संस्थापक कमला देवी व निदेशक वंदना अग्रवाल की मौजूदगी रही।
रोजगार से जुड़े, अनुभव सुनाए
आशीर्वाद समारोह में राज्यपाल कल्याणसिंह के हाथों निशक्तजनों को कृत्रिम अंग, कैलीपर, व्हील चेयर, श्रवण यंत्र के साथ ही स्वरोजगार के लिए हाथ ठेले व सिलाई मशीन आदि भेंट करवाए गए। समारोह में बतौर मेहमान आए पूर्व विवाहित जोड़ों ने जीवन के अनुभव सुनाए।
उपहारों के साथ विदाई

विवाह रस्मों के साथ शाम 4 बजे नवविवाहितों को विदाई दी गई। विवाह रस्मों में धर्म माता-पिता बने भामाशाहों ने नम आंखों से वधुओं को विदा किया। भामाशाहों ने वधुओं को मंगल सूत्र, पायल, बिछियां, कर्णफूल, चूडिय़ां, वस्त्र, घरेलू उपयोगी सहित कई तरह की सामग्री भेंट की।
एक-आध खर्च में कटौती कर सेवा में लगाए : राज्यपाल

समारोह में बतौर अतिथि आए राज्यपाल कल्याण सिंह ने कहा कि हमारे ऋषियों ने सिद्धार्थ का पालन किया और सेवा का संदेश दिया है। जीओ और जीने दो संदेश के कारण भारतीय संस्कृति महान है। वर्तमान परीपेक्ष्य में ‘जीओ दूसरों के लिए।’ जरूरतमंदों की सेवा करने वाली संस्था के लिए दिनभर के खर्च में एक-आध कटौती करें। ऐसी संस्थाओं को आर्थिक सहयोग दें तो जरूरतमंदों के जीवन में बदलाव आएगा। राज्यपाल ने कहा कि निशक्तजन बड़ी तकलीफों से गुजरते हैं। ये तकलीफें हमारे साथ होतीं तो दर्द महसूस होता। निशक्तजनों की सेवा ईश्वर पूजा के समान है, हमें हर संभव इनकी सेवा में जुटना चाहिए। निशक्तों को चिकित्सा के साथ ही रोजगार देकर आमजन की तरह जीने के लिए संबल दें। इस मौके पर राज्यपाल ने निशक्तजन की सहायतार्थ 51 हजार रुपए सहयोग देने की घोषणा की। मेयर चंद्रसिंह कोठारी ने भी विचार रखे। समारोह में दयालु महाराज, यूके से आए प्रमोद पटेल सहित कई विशिष्टजन मौजूद थे।
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