शिक्षक थे बच्चे, स्कूल पर लगा था ताला
कोटड़ा में आकस्मिक निरीक्षण पर पहुंचे डीईओ
सरकारीस्कूलों में एक और क्वालिटी एजुकेशन की बात हो रही है, वहीं स्कूलों के ताले भी नहीं खुल रहे हैं। ऐसी ही हकीकत कोटड़ा प्राथमिक स्कूल, घाटा में गुरुवार को देखने को मिली। जिला शिक्षा अधिकारी भूपेन्द्र जैन को आकस्मिक निरीक्षण के दौरान स्कूल के ताला लगा मिला।
जानकारी के अनुसार डीईओ दोपहर दोपहर 12 से 1 बजे के बीच स्कूल पहुंचे थे। वहां ना तो बच्चे थे और ना ही शिक्षक। स्कूल सुबह 10 से शाम 4 बजे तक संचालित होना चाहिए था। यहां के शिक्षक मनीष झाला को कारण बताओ नोटिस थमाया है। बीईओ गिर्वा वीरेंद्र यादव एवं एबीईओ नरेन्द्र व्यास की कमेटी गठित कर मामले में जांच के आदेश दिए हैं। डीईओ ने इस मामले में क्षेत्रीय वार्डपंच सोनाराम और ग्रामीण सोहनलाल, चुनाराम एवं रासाराम से बातचीत की। जिसमें पता लगा कि शिक्षक मनीष झाला 10 दिन में सिर्फ दो-तीन बार ही स्कूल पढ़ाने आता है जिसमें भी सुबह 11 बजे आकर 2 बजे चला जाता है। ग्रामीणों ने डीईओ को बताया कि ये स्कूल मात्र कागजों में संचालित है। बच्चों को अक्षर का भी ज्ञान नहीं है। शिक्षक झाला यहां लम्बे समय से कार्यरत है। डीईओ ने घाटा स्कूल के अलावा पांडिबोर प्राथमिक विद्यालय, रुजिया खुणा प्राथमिक विद्यालय का भी निरीक्षण किया। जहां शिक्षकों को छात्रों के स्तर में सुधार और पोषाहार में गुणवत्ता बढ़ाने के निर्देश दिए। बच्चों को पासबुक का उपयोग ना करने की हिदायत भी दी।