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बोलचाल की भाषा में प्रचारित हों महिला उत्पीड़न के अधिनियम
हाईकोर्ट जोधपुर के न्यायाधीश गोविंद माथुर ने कहा कि महिला उत्पीड़न से जुड़े कानूनी पहलुओं के प्रति जागरूकता होनी चाहिए। महिला उत्पीड़न के मुख्य कारणों में से अहम बात ये है कि पुरुषों के पास उत्पादन के संसाधनों का मालिकाना हक और निर्णय शक्ति की प्रधानता है। महिलाएं एेसे हक और शक्तियां नहीं रखतीं। दो साल पहले पारित नए अधिनियम को आमजन की भाषा में प्रचारित करने की जरूरत है। महिलाएं भी पारंपरिक वर्जनाएं छोड़ते हुए अपने से जुड़े विषय में जागृत हों।
न्यायाधीश माथुर सुखाड़िया यूनिवर्सिटी की आंतरिक शिकायत समिति एमएचआरएम की ओर से शनिवार को ‘महिला उत्पीड़न रोकथाम के लिए सामान्य जागरूकता’ विषयक राष्ट्रीय सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। यूनिवर्सिटी परिसर स्थित न्यू गेस्ट हाउस में सेमिनार में एमएचआरएम के निदेशक प्रो. दरियाव सिंह चूंडावत ने स्वागत उद्बोधन दिया।
विशिष्ट अतिथि जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी की प्रो. सुनीता जैदी ने कहा कि महिला उत्पीड़न रोकने के लिए नए कानून बनाने के बजाय सामजिक सोच में सकारात्मक बदलाव की जरूरत है। शिक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और निर्णयात्मक शक्ति महिला उत्थान के लिए जरुरी है। सुविवि वीसी प्रो. आई.वी. त्रिवेदी ने कहा कि दक्षिणी राजस्थान में महिलाओं की स्थिति चिंताजनक है, ऐसे में महिला उत्पीड़न को लेकर शिक्षण संस्थाओं को सक्रियता लाने की जरूरत है। संयोजक प्रो. मीना गौड़ ने विचार रखे। संचालन डाॅ. मीनाक्षी जैन ने किया। प्रो. एस.के. कटारिया ने आभार जताया।
तकनीकी सत्र और खुली चर्चा : टेक्निकलसेशन में देहली स्कूल आॅफ इकोनॉमिक्स के प्रो. अजय कुमार सिंह, राजस्थान विविव के प्रो. संजीव भाणावत, भीलवाड़ा कॉलेज से प्रो. देवकांता शर्मा ने विचार रखे। अध्यक्षता प्रो. के. एस. गुप्ता ने की। खुली चर्चा की अध्यक्षता जेएनयू जोधपुर के डाॅ. सुशीला शक्तावत ने की। प्रो. सुधा चौधरी, प्रो. वी.एल. चौहान, डाॅ. दिग्विजय भटनागर, डाॅ. जे.के. ओझा, डाॅ. इरा भटनागर, डाॅ. संजय लोढ़ा, डाॅ. प्रतिभा आदि ने भी विचार रखे।
सेमिनार में मंचासीन जस्टिस माथुर अन्य अतिथि। फोटो: भास्कर
एमएलएसयू अतिथि गृह में सेमिनार में शामिल फैकल्टी स्टूडेंट्स। भास्कर