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\"पराधीनता से स्वप्न में भी सुख नहीं मिलता है\'
उदयपुर | बीसाहुमड़ भवन में सोमवार को धर्मसभा में आचार्य शांतिसागर महाराज ने कहा कि पराधीनता से स्वप्न में भी सुख नहीं मिलता है। मनुष्य को पांचों इंद्रियों से स्वाधीन होना चाहिए। इंद्रियों को गुलामी से बचना चाहिए क्योंकि इंद्रियों की गुलामी से पाप कार्य होंगे। त्याग, तपस्या, साधना, संयम, स्वाध्याय एवं दान आदि पुण्य कार्य करके मानव जन्म को सार्थक करना चाहिए।