उदयपुर. मंडी मार्ग स्थित बाई जी राज कुंड मंदिर में शनिवार को पुष्प सांझी मनोरथ हुआ। इस मौके पर ‘छबरिया बांस की फूलन फूल भरी, कबहुं कटी पर, कबहुं कर पर, कबहुं शीश धरी...’, ‘अरी तुम कोन हो री फुलवा बिनन वारी, नेह लगन को बन्यो बगीचा फूल रही फुलवारी...’, ‘पूजवत सांझी किरत माय कुंवर प्यारी राधा को लाड लड़ाय...’ आदि पदों का गायन किया गया।
श्राद्ध पक्ष के चलते मांगलिक आयोजनों पर विराम है, ऐसे में मंदिरों में कई तरह के सांझी मनोरथ हो रहे हैं। बाईजी राज कुंड मंदिर में पुष्प सांझी में गुलाब, गेंदा, चांदनी, मोगरा सहित कई तरह के फूलों से कलात्मक सांझी का अंकन किया गया। नवनीत प्रभु की आकृति के साथ विभिन्न आकृतियां दर्शाई गई। काष्ठ की गोपियों के बीच राधा-कृष्ण की छवियां विराजित की गई। पीठाधीश्वर मोहन वल्लभ आचार्य ने सांझी से जुड़े पदों का गायन किया। महाप्रभु हरिराय जन्म दिवस के मौके पर हुए आयोजन में बड़ी संख्या में भक्त दर्शन को पहुंचे।
धर्म प्रचार समिति की ओर से हुए आयोजन में पीठाधीश्वर ने कहा कि जिन प्रभु का आश्रय लिया, उन्हीं प्रभु के प्रति समर्पित भाव प्रकट करें। मनोहर लाल मूंदड़ा ने बताया कि महाप्रभु के शिक्षा पत्र में संदेश मिलता है कि आराध्य को छोड़कर दूसरों का आश्रय लेना ही अन्याश्रय है। संस्कृति की सीख है कि आराध्य एक, लेकिन सम्मान सभी का किया जाए। संत गोपाल दास, हरिओम शरण, सागर मल, राजेश मूंदड़ा, मालती स्वामी आदि ने विचार रखे।
गोवर्धननाथ मंदिर में जल सांझी मनोरथ 19 से
भट्टीयानी चौहट्टा से कसारों की ओल के बीच स्थित गोवर्धन नाथ मंदिर में जल सांझी मनोरथ 19 से 23 सितंबर तक होगा। पुजारी राजेश वैष्णव पारंपरिक जल सांझी कला से मनोरथ करेंगे। जल पर सूखे रंग बिछाकर कलाकृतियां दर्शाई जाएगी।
फोटो. बाईजी राज कुंड पर सजी जल सांझी।