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सूचियां बनाने वाले ही सुधार को तैयार नहीं

7 वर्ष पहले
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उदयपुर. जिले में पिछले साल जिन ग्राम सेवकों ने खाद्य सुरक्षा योजना की सूचियां तैयार की थीं, अब वे ही इन सूचियों में संशोधन करने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि ‘विधानसभा चुनाव सिर पर थे तो हमसे रातों-रात सूचियां बनवाई गई। आनन-फानन हुए काम में कई लोग ऐसे भी जुड़ गए, जो योजना के दायरे में ही नहीं रहे थे। स्थानीय नेताओं और जनता के दबाव में सूचियों का अनुमोदन करवाया गया था। अब भामाशाह योजना के कई कार्यों का भार है तो खाद्य सुरक्षा योजना में बनी सूचियों का वेरिफिकेशन हम नहीं करेंगे।’

दरअसल, पिछले साल गहलोत सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई खाद्य सुरक्षा योजना का वेरिफिकेशन हाल ही वसुंधरा सरकार ने करने की ठानी, लेकिन सफलता नहीं मिल रही है। ग्राम सेवकों ने खाद्य सुरक्षा योजना की सूचियों का वेरिफिकेशन करने से इनकार कर दिया है। ग्राम सेवकों ने मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारियों को ज्ञापन देकर बताया है कि भामाशाह शिविरों में भी सत्यापक ग्राम सेवकों को ही बनाया गया है, ऐसे में काम की अधिकता के चलते खाद्य सुरक्षा का काम नहीं करेंगे। ग्राम सेवक उपखंड अधिकारियों को ज्ञापन देकर खाद्य सुरक्षा का वेरिफिकेशन करने से इनकार कर रहे हैं।

ग्राम सेवकों ने ही नाम जोड़े, उनकी जानकारी में है तो वे संशोधन भी कर सकते हैं। सरकार ने भी उन्हें ही काम सौंपा है। कुछ जगहों पर कर रहे हैं, कुछ विरोध जता रहे हैं। हमने उच्चाधिकारियों से मार्गदर्शन मांगा है। एन.के.कोठारी, जिलारसद अिधकारी, उदयपुर-द्वितीय

भामाशाहशिविरों से 10 दिन पहले खाद्य सुरक्षा की सूचियां पेश करनी है। पिछले दिनों उदयपुर संभाग में सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के कारण यह काम नहीं हो पाया। वेरिफिकेशन का काम प्रभावित होने से कुछ देरी हुई है। डॉ.सुबोध अग्रवाल, प्रिंसिपलसेक्रेटरी, खाद्य विभाग

जनगणना 2011 का आधार लेना गलत

ग्रामसेव कों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा की शुरुआत में ही तकनीकी खामी रही है। 2011 की जनगणना को आधार मानते हुए चयन करवाया गया, जबकि तीन साल में काफी बदलाव गया था। ऐसे में पात्र-अपात्र की दो श्रेणियां बनाकर 69 प्रतिशत लोगों का चयन करना था, जबकि पात्र में 80 प्रतिशत और अपात्र में 95 प्रतिशत लोग रहे थे।