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खदान से स्टैंड तक बजरी कारोबार ठप, धीमी हुई कंस्ट्रक्शन की चाल

7 वर्ष पहले
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जिलेमें लगातार तीसरे दिन भी बुधवार को खदान से लेकर स्टैंड तक बजरी कारोबार बंद रहा। हजारों श्रमिक, ड्राइवर सहित अन्य कामगर स्टैंड पर बेरोजगार बैठे रहे। इधर, निर्माणाधीन मकानों के मालिक बजरी के लिए प्रतापनगर और रेती स्टैंड सहित अन्य स्टेंड पर चक्कर काटते रहे, लेकिन नहीं मिलने पर उनके मकान निर्माण की चाल धीरे हो गई।

बजरी संकट के बीच अन्य जिलों से बजरी के कालाबाजारी होने की आशंका बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार प्रतिदिन उदयपुर में 300 ट्रक-ट्रैक्टर बजरी परिवहन होता है और इससे सीधे तौर पर करीब 5000 लोग रोजगार से जुड़े हैं। ऐसे में ये व्यापार फिलहाल पूरी तरह ठप है। बजरी यूनियन की ओवरलोडिंग में कथित कार्रवाई और अंडरलोडिंग रेती परिवहन के दाम बढ़ाने की मांग है जिसे लेकर वे पिछले तीन दिनों से हड़ताल पर हैं।

आजकलेक्टर से मिलकर करेंगे वार्ता : बजरीट्रक एवं ट्रैक्टर यूनियन के अध्यक्ष अंतोष चौधरी ने बताया कि मांग को लेकर गुरुवार दोपहर 1 बजे कलेक्टर से वार्ता करेंगे। इस दौरान कलेक्टर से मार्बल, पत्थर आदि पर पर कार्रवाई की बजाय बजरी पर की जा रही कार्रवाई का विरोध होगा। इसके अलावा 6 माह पूर्व जब 490 रुपए टन बजरी के दाम निर्धारित करते हुए 25 टन परिवहन लाने पर सहमति बनी थी। तो इसे घटाकर 9 टन बजरी परिवहन क्यों किया गया। इससे हमारा खर्च बढ़ गया है।