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10 साल पुरानी चूक सुधारने में बीते तीन साल, अब मिली पेंशन
कर्मचारीभविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में तीन साल पहले पहुंचे एक मामले में आखिर अब पेंशन जारी करने के आदेश हुए। मामला 13 साल पहले बंद हो चुकी फैक्ट्री के एक श्रमिक का है। वह तीन साल से पेंशन का इंतजार कर रहा था। कंपनी में एक ही नाम के 12 श्रमिक, उनमें से भी 2 जनों के पिता का नाम भी एक होने से ये परेशानी खड़ी हुई।
मामला माताजी का खेड़ा गांव के 62 वर्षीय प्रताप सिंह पिता भंवर सिंह का है। वह लोयरा में स्थापित फैक्ट्री श्रुति सिंथेटिक में श्रमिक था। 13 साल पहले फैक्ट्री बंद हो गई। उस समय पीएफ के लिए श्रमिकों के फार्म भरे गए। कंपनी प्रतिनिधियों ने फार्म में प्रताप सिंह के पिता का नाम गलती से हमेर सिंह लिख दिया।
घटना के 10 साल बाद प्रताप सिंह ने पेंशन के लिए आवेदन किया, लेकिन रिकॉर्ड से मिलान नहीं होने से पेंशन जारी नहीं हुई। वह बंद फैक्ट्री से दस्तावेज नहीं जुटा पाया और पेंशन का इंतजार करता रहा। पीएफ ऑफिस द्वारा कंपनी प्रतिनिधियों का पता लगाकर रिकॉर्ड निकलवाया। मामला और पेचीदा हो गया, जब कंपनी ने प्रताप सिंह नाम के ही 12 श्रमिकों का रिकॉर्ड दिया। उसमें भी 2 प्रताप सिंह के तो पिता का नाम भी भंवर सिंह ही है। अंत में प्रताप सिंह द्वारा शुरुआत में दी गई प|ी बेटों की जानकारी से समाधान हो पाया। कंपनी प्रतिनिधियों द्वारा गलती स्वीकार कर प्रताप सिंह के नाम पेंशन जारी करने के आदेश दिए।
संस्थान बंद हो जाने और एक ही नाम के कई श्रमिक होने की स्थित में भुगतान में परेशानी आती है। श्रमिक और ईपीएफओ के बीच नियोक्ता है, जिसकी एक गलती के कारण पेंशन रुक गई। नियोक्ताओं को सावधानी रखनी चाहिए। अरुणकुमार, आयुक्त,ईपीएफओ उदयपुर
ईपीएफओ के सहायक आयुक्त पी.आर. जैन ने बताया कि श्रम कानून के नियमानुसार श्रमिकों-कर्मचारियों को हर माह भुगतान से पहले वेतन पर्ची दी जानी चाहिए। इसमें हाजरी, भुगतान की जानकारी होती है। आमतौर पर नियोक्ता वेतन पर्ची नहीं देते और जरूरत पड़ने पर श्रमिक अपने रिकॉर्ड के लिए भटकता है। आमतौर पर 58 साल उम्र होने पर पेंशन जारी होती है। फैक्ट्री बंद होने जैसी समस्या में श्रमिक चाहे तो 50 की उम्र में भी पेंशन आवेदन कर सकता है। फर्क इतना सा है कि पेंशन राशि 4 प्रतिशत कम मिलेगी।
हर माह लें वेतन पर्ची