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टूट चुकी थी अास, सेना ने दिया जीवनदान

7 वर्ष पहले
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उदयपुर. जिस होटल में हम ठहरे थे, उसमें दो मंजिल तक पानी था। बचाव और मदद के लिए हमने पांचवीं मंजिल पर दिन-रात निकाले। बिजली थी, खाने को कुछ। होटल में फंसे बच्चों को पाउडर से दूध बनाकर और खुद चने खाकर समय निकाला। जिंदगी की आस छोड़ चुके थे, लेकिन शुक्र है कि देवदूत बनकर पहुंची सेना के हेलिकॉप्टर ने हम सबको बचा लिया। यह कहना है कश्मीर से लौट कर आए सुंदरवास के रवींद्र नगर निवासी लाभसिंह सलूजा और उनकी जीत कौर का। दंपती घूमने के लिए गया था और बाढ़ में चार दिन फंसे रहने के बाद मंगलवार को लौटा।
सलूजा ने बताया, श्रीनगर के राज बाग स्थित 5 मंजिला होटल की छत पर खड़े होकर पानी घटने का इंतजार करते रहे। बचाओ-बचाओ की आवाजें कम होने का नाम नहीं ले रही थीं। तीन दिन होटल में भूखे-प्यासे बिताए। जनरेटर रूम में पानी होने से बिजली नहीं थी। होटल में करीब 200 लोग थे, जिनमें से कई के छोटे बच्चे भी थे। हम यहां से साथ में चने और दूध पाउडर लेकर गए थे, जो हमने उन बच्चों को दिए। खाने को और कुछ नहीं था। सुविधाघरों का पानी पीकर प्यास बुझाई, लेकिन तीसरे दिन वह भी खत्म हो गया। होटल मालिक हमारी हर संभव मदद करता रहा। कश्मीर से लौटे सलूजा दंपती।
देवदूत बन हेलिकॉप्टर से आए सेना के जवान
जीत कौर ने बताया, चौथे दिन जब मदद मिलने की आस टूटने लगी थी, तब अचानक सुबह सेना के जवान देवदूत बनकर हेलिकॉप्टर से पहुंचे। वे पहले महिलाओं और बच्चों को, फिर बाकी लोगों को अपने साथ ले गए। सेना के जवानों ने लोगों की बहुत मदद की। उन्होंने बाढ़ से निकालने के अलावा फोन से रिश्तेदारों से संपर्क करवाया। हमारा सारा सामान होटल में छूट चुका था। ऐसे में सेना के जवानों ने टेम्पो तक के पैसे दिए। बच्‍चों की दुआएं ही थीं कि हम सही सलामत घर लौट अाए।