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- \"जमीन मांगने वाले सैकड़ों, शहर की भी चिंता कर लो\'
\"जमीन मांगने वाले सैकड़ों, शहर की भी चिंता कर लो\'
दोनों संस्थाएं संघ विचारधारा की
ट्राइबल यूनिवर्सिटी को एक प्रताप गौरव केंद्र को तीन करोड़
विपक्षके भारी हंगामे के बीच शुक्रवार को नगर निगम बोर्ड की आखिरी बैठक में दो संस्थाओं को रियायती दर पर जमीन देने का प्रस्ताव पास कर लिया गया। दो घंटे की बैठक में आधा घंटे हंगामा होता रहा। विपक्ष ने यह कहते हुए विरोध किया कि पर्याप्त जमीन नहीं होने के बावजूद भाजपा बोर्ड चुनावी फायदा उठाने के लिए ये प्रस्ताव ले रहा है, जबकि अब तक किसी भी बोर्ड ने इस तरह की अनुशंसा नहीं की है। जमीन मांगने के लिए तो सैकड़ों संस्थाएं जाएंगी, लेकिन शहर में जरूरी सुविधाएं विकसित करने के लिए नया बोर्ड जमीन कहां से लाएगा। मेयर रजनी डांगी की अध्यक्षता कमिश्नर हिम्मतसिंह बारहठ की माैजूदगी में हुई बैठक की शुरुआत में ही विपक्ष ने सवाल शुरू कर दिए। इस बीच सेक्टर 11 में अखिल भारतीय संस्कृति समन्वय संस्थान को शोध केंद्र विकसित करने केे लिए 4950 वर्ग फीट बप्पारावल जागृति संस्थान को जनजाति बालिका छात्रावास के लिए 10 हजार वर्ग फीट जमीन देने का प्रस्ताव पास कर दिया गया। अनुशंषा के बाद यह प्रस्ताव मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेजा जाएगा। बैठक में रेहाना जर्मनवाला, नफीसा सैफ, मुस्लिम अली बंदूकवाला ने तैय्यबियाह स्कूल के बाहर अतिक्रमण गंदगी का मुद्दा उठाया। नेता प्रतिपक्ष दिनेश श्रीमाली, कांग्रेसी पार्षद शिप्रा उपाध्याय भाजपा पार्षद अर्चना शर्मा ने इस बात को लेकर रोष जताया कि वल्लाभाचार्य पार्क में सामुदायिक भवन बनाने की मेयर ने घोषणा की थी, मगर अब तक यह काम नहीं हुआ।
कांग्रेस पार्षदों ने कहा कि मतदाताओं को हमसे काम की बड़ी उम्मीद थी, मगर हम बोर्ड के कारण मतदाताओं का मन जीत नहीं पाए। पांच साल में जनता के काम समयबद्धता से नहीं हो सके। विपक्ष ने जनता से जुड़े कई प्रस्ताव दिए उनको बोर्ड बैठक में रखा ही नहीं गया।
बोर्ड बैठक में अपनी बात रखने का मौका नहीं मिलने से खफा कांग्रेसी पार्षद शिप्रा उपाध्याय ने डायस पर रखा माइक उठाकर नीचे पटक दिया। भास्कर
हम किसी को जमीन आबंटन नहीं कर रहे। बोर्ड की ओर से सिर्फ प्रस्ताव पास किया जा रहा है। जमीन देनी है या नहीं अंतिम निर्णय सरकार को करना है। ये जमीन रेल लाइन के पास मगरी की है वहां पार्किंग विकसित नहीं हो सकती। ये नामी संस्थाएं हैं। हमें कोई राजनीतिक लाभ नहीं लेना है यह जनह