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तपस्या में मनुष्य जन्म की सफलता : शांतिसागर
संतों के मुख से
आचार्यशांति सागर ने कहा कि जो तपस्या करते हैं, वे ईश्वर का आशीर्वाद पाने के हकदार हो जाते हैं। उन्हें साधु-संतों का सानिध्य भी हमेशा मिलता है। तपस्वियों से प्रेरणा लेकर हर व्यक्ति को तपस्या की ओर अग्रसर होना चाहिए। तपस्या में ही मनुष्य जन्म की सफलता है।
आचार्यश्री रविवार को बीसा हुमड़ भवन में आयोजित तपस्वी सम्मान समारोह में बोल रहे थे। यहां क्षमावाणी पर्व मनाने के साथ ही तपस्वियों का सम्मान किया गया। बीते दिनों में 32, 16, 10, 8 उपवास करने वाले तपस्वियों का सम्मान सांसद अर्जुन लाल मीणा, जिला प्रमुख मधु मेहता, महापौर रजनी डांगी ने किया। शांति लाल नागदा, नाथूलाल खलुड़िया, चंदन लाल छापिया, सुमि लाल दुदावत, अंजना गंगवाल, मंजू गदावत मौजूद रहे। डॉ. मोती लाल चित्तौड़ा ने दीप प्रज्जवलन, जीवेंद्र लाल लिखमावत ने पाद पक्षालन किया।
तेरापंथ भवन : साध्वीकनकश्री ने कहा कि विद्या और आचरण से हर समस्या का समाधान हो सकता है। आगम ग्रंथों का पठन करना चाहिए। इससे ज्ञान वृद्धि होती है। तेरापंथ भवन में जैन विद्या परीक्षा आगम मंथन प्रतियोगिता के विजेताओं का सम्मान समारोह हुआ। तेरापंथी सभा अध्यक्ष राजकुमार फत्तावत ने बताया कि उदयपुर की संगीता पोरवाल ने तेरापंथ दर्शन परीक्षा में तृतीय स्थान पाया।
आदिनाथ भवन, सेक्टर-11 : आचार्यकनकनन्दी ने कहा कि जैसे बीज में शक्ति रूप से वृक्ष समाया है, उसी प्रकार जीव में भी शक्ति रूप में परमात्मा है। बीज को अनुकूल वातावरण मिलने पर शक्ति जागृत होती है और वह पौधे का रूप लेने लगती है। आध्यात्म शक्ति से आत्मा ही परमात्मा रूप से प्रकट हो सकती है।
पंचायती नोहरा : श्रमणसंघीय महामंत्री सौगाग्य मुनि ने कहा कि भौतिकवाद के अतिप्रवाह के कारण आज पूरा जीवन अर्थ चक्र के आसपास घूमने लगा है। कला, बौद्धिकता आदि मानव की सारी प्रतिभाएं अर्थ से परिभाषित होने लगी हैं। संवेदनाएं अर्थ के खूंटे में बंध गई है। जहां अर्थ सिद्ध होता है, व्यक्ति की प्रतिभा वही तक काम करती है।
हुमड भवन में तपस्वियों का सम्मान करते अतिथि। फोटो: भास्कर
हुमड़ भवन में रविवार को समारोह में शामिल श्रावक-श्राविकाएं। फोटो: भास्कर