नो मिनिस्टर!
17 कलेक्टरों और 8 एसपी के तबादले तय
राज्यके आधे से ज्यादा जिलांे में प्रशासन और पुलिस की कमान बदलने की तैयारियां हैं। सूची किसी भी समय सकती है। जिन कलेक्टरों के तबादले होने हैं, उनमें उदयपुर, बाड़मेर, बांसवाड़ा, झुंझुनूं, कोटा, हनुमानगढ़, सवाई माधोपुर, बीकानेर, बूंदी, टोंक, दौसा, जालौर, धौलपुर, जैसलमेर, प्रतापगढ़, करौली और सीकर हैं। जिन जिलों के एसपी बदले जाने हैं, उनमें एसपी प्रतापगढ़ दौसा, सीकर, चूरू, धौलपुर, कोटा, करौली और झुंझुनूं शामिल हैं। संभागीय दौरों की रिपोर्ट के बाद कुछ उलटफेर भी संभव है।
भागोनहीं, प्रदेश को बदलो!
वसुंधराराजे की सरकार बनते ही आईएएस अफसरों में दिल्ली से राजस्थान आने की होड़ मची, लेकिन मैडम की बदली हुई कार्यशैली ने उन्हें परेशानी में डाल दिया है। वजह ये कि महीने में 15-15 दिन गांवों की खाक छानो, पसीने से लथपथ रहो और रेत में नहाओ! पहले संभाग का दौरा करो , फिर लौटने के बाद वापस जाओ। ऐसे तो पांच साल में जान निकल जाएगी! कुछ अफसरों ने दिल्ली में कोिशशें शुरू की तो उन्हें नसीहत दी गई : भागो नहीं, प्रदेश को बदलो!
मुख्यमंत्रीने फिर चौंकाया
मुख्यमंत्रीने सारी अटकलों को एक तरफ कर जिस तरह से कैलाश मेघवाल को विधानसभा अध्यक्ष बनाकर सभी को चौंका दिया था। उसी तरह इस बार आईएएस पीएस मेहरा को प्रमुख वित्त सचिव बनाकर ब्यूरोक्रेसी को चकरा दिया। एक खास वर्ग से जुडे़ व्यक्ति को विधायिका और फिर राज्य की वित्त व्यवस्था के सर्वोच्च पद पर भी उसी वर्ग के व्यक्ति को तैनात कर यह संकेत दिया गया है कि उनके लिए सब बराबर हैं। हालांकि आईएएस सुभाष गर्ग के यूं अचानक राजस्थान से रुखसत होने को बड़ी घटना माना जा रहा है। लेकिन कहीं कहीं यह भी सवाल सुनने को मिल रहे हैं कि यदि वे इतने ही काबिल थे तो प्रदेश के आर्थिक हालात को सुधारने के लिए वित्त महकमे में उनको रोका क्यों नहीं गया? उन्हें तत्काल क्यों रवाना कर िदया गया?