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स्टाफ की कमी के बीच 10 टेक्नीशियन को बनाया बाबू
एमबीअस्पताल की सेंट्रल लैब से अधूरी जांच रिपोर्ट्स दी जा रही हैं। यहां शनिवार को 20 और इससे पहले शुक्रवार को 32 मरीजों को अधूरी रिपोर्ट दी गईं। कारण, टेक्नीशियनों की कमी बताया गया, क्योंकि लैब के 30 टेक्नीशियंस की सेवाएं 31 जनवरी को कॉन्ट्रेक्ट खत्म होने के साथ समाप्त कर दी गई थीं। भास्कर ने पड़ताल की तो सामने आया कि अस्पताल के करीब 10 टेक्नीशियंस से क्लर्क के काम करवाए जा रहे हैं। ऐसा बरसों से चल रहा है।
इसलिए मिल रही गलत रिपोर्ट : टेक्नीशियनों की कमी से रात को लैब बंद रहती है। ऐसे में रात भर आने वाले भर्ती मरीज इमरजेंसी केसेज में सैंपल तो ले लेते हैं, लेकिन उनकी जांच सुबह 9 बजे शुरू होती है। सुबह के टेक्नीशियनों पर डबल लोड रहता है। ऐसे में जांचें भी अधूरी रहती हैं। यही रिपोर्ट्स मरीजों को अगली शाम मिलती हैं।
कॉलेज में क्लर्क कम हैं, दो की पोस्टिंग लैब में की है
^टेक्नीशियनविभिन्न विभागों में बाबूओं का काम कर रहे हैं। इस बारे में जानकारी है। उनमें से दो की पोस्टिंग लैब में लगाई है। कॉलेज के विभागों में बाबूओं की कमी है। उन्हें हटाने से व्यवस्थाएं गड़बड़ा सकती है। इस बात का ध्यान रखते हुए जल्द कुछ और टेक्नीशियनों को लैब में लगाया जाएगा। डॉ.तरुण गुप्ता, अधीक्षक, एमबी अस्पताल
अस्पताल के नेत्र रोग, ईएनटी, कार्डियोलॉजी, फिजियोलॉजी, फार्माकोलॉजी, सर्जरी, माइक्रोबायोलॉजी विभाग के अलावा मेडिकल कॉलेज प्रशासनिक भवन में 10 टेक्नीशियंस को क्लर्क का काम कराया जा रहा है। बड़ी बात यह है कि बाबू का काम करते हुए ये टेक्नीशियन के सभी लाभ और सुविधाएं ले रहे हैं। टेक्नीशियनों को वेतन के अलावा तीन स्पेशल अलाउंस के तहत 700 से 800 रुपए मिलते हैं। स्पेशल पे, जो कि टेक्नीशियन का काम करते हुए संक्रमण के रिस्क को ध्यान में रख कर दिए जाता है। इसके तहत प्रतिमाह 500 रुपए स्पेशल डाइट के लिए हर माह 150 रुपए, धुलाई भत्ते के 100 रुपए दिए जाते हैं। बाबू के पद का कार्य करते हुए टेक्नीशियन ये सभी लाभ ले रहे हैं।