उदयपुर। पंचायत चुनाव के नतीजे आने के बाद से छह दिन की बाड़ेबंदी में चल रहे जिला परिषद मेंबर रविवार को उप जिला प्रमुख की वोटिंग के बाद परिजनों के बीच आ सके। जिला परिषद में बोर्ड बनने उम्मीद के चलते भाजपा के सभी प्रत्याशियों को 2 फरवरी को ही बाड़ाबंदी कर निगरानी में लिया गया था। इनको होटल, रिसोर्ट में अलग-अलग रखा गया।
गुरुवार को चुनाव परिणाम आने के बाद इनके
मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ करवा दिए गए। शुक्रवार को शपथ के लिए कलेक्ट्री लाया गया। उसके बाद फिर बाड़ाबंदी कर अज्ञात जगह पहुंचा दिया गया था। शनिवार को जिला प्रमुख के चुनाव के बाद फिर से नजरबंद कर लिया गया। रविवार को उप प्रमुख के चुनाव के बाद जिला परिषद सदस्य उनके घर जा सके।
कटारिया के घर सुबह 9 बजे तय हुआ भाणावत का नाम
उप जिला प्रमुख को लेकर शनिवार देर रात तक पार्टी कार्यालय में मीटिंग में पूर्व देहात जिलाध्यक्ष सुंदरलाल भाणावत और जिला मंत्री भंवरसिंह पंवार के नाम की चर्चा चली। दोनों दावेदारों को मीटिंग से बाहर भेजकर सभी ने अंतिम फैसला गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया पर छोड़ दिया था। रविवार सुबह जिलाध्यक्ष तख्तसिंह शक्तावत और प्रमोद सामर कटारिया के घर गए। वहां सुबह 9 बजे भाणावत को वरिष्ठता के आधार पर नाम पर मुहर लगी। भाणावत इससे पहले एक बार जिला परिषद का चुनाव हार चुके हैं।
दूसरे दिन भी नहीं आए जनता सेना के भूरालाल
भाजपा व कांग्रेस के सभी सदस्य समय रहते वोट डाल गए, मगर वार्ड 32 से निर्दलीय चुने गए भूरालाल वोट डालने नहीं आए। उनका पांच बजे तक इंतजार बना रहा। समय पूरा होने के बाद मतगणना का काम शुरू हो सका। जनता सेना समर्थित भूरालाल ने शनिवार को जिला प्रमुख के लिए भी वोटिंग नहीं की थी।
भाजपा नेता दिखे, कांग्रेस के नदारद
उप जिला प्रमुख के चुनाव के दौरान नवनिर्वाचित जिला प्रमुख शांतिलाल मेघवाल, ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा, गिर्वा प्रधान एवं देहात जिलाध्यक्ष तख्तसिंह शक्तावत, रोशनलाल जैन, कुंतीलाल जैन व प्रमोद सामर,दीपक बोल्या, देवीलाल सालवी, पूर्व पार्षद मनोहर दया, प्रवीण खंडेलवाल सहित कई भाजपाई मौजूद थे। कांग्रेस की ओर से कोई भी बड़ा पदाधिकारी कलेक्ट्री में नजर नहीं आया।
टकराव की स्थिति देख, तैनात रहा जाप्ता
प्रमुख के चुनाव के दौरान भाजपा खेमे में ही टकराव की स्थिति बनी थी। एेसे में उप प्रमुख के चुनाव के दौरान भूपालपुरा थानाधिकारी चांदमल नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले से परिणाम आने तक कलेक्ट्री में मुस्तैद रहे। कलेक्ट्री परिसर में जिला परिषद की ओर से आने वाले रास्तों के नुक्कड़ पर भी जाप्ता तैनात किया गया।