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7 वर्ष पहले
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धीमी पड़ जाती है ब्लड पंपिंग, बढ़ा देता है हार्ट फेल्योर का खतरा

क्या है मायोकार्डिटीज वायरल

हेल्थ

अब दिल, फेफड़ों पर भी अटैक करने लगा वायरल

वायरलबुखार आपके दिल और फेफड़ों पर भी असर डाल सकता है। संभाग के सबसे बड़े एमबी अस्पताल में ऐसे दो केस सामने आए हैं, जो हृदय संबंधी बीमारी मायोकार्डिटीस की चपेट में गए। दोनों मरीजों की उम्र 30 से 40 वर्ष के बीच है। संभाग में पहली बार वायरल का यह रूप देखकर डॉक्टर भी हैरान हैं। अभी दोनों मरीजों का अहमदाबाद के अस्पताल में इलाज चल रहा है। शहर के समीप बेदला से आए एक मरीज के रक्त पंपिंग क्षमता तो 25 फीसदी रह गई थी, जो 60 से 70 प्रतिशत होती है। उदयपुर में इन मरीजों को वायरल का इलाज ही दिया गया। दोनों की मेडिकल हिस्ट्री भी सामान्य रही है।

खतरनाक होने लगा वायरल

वायरल का रूप जटिल हो रहा है। वायरल के मरीजों में 1 फीसदी ही मायोकार्डिटीस के हो सकते हैं। कुछ मरीजों के फेंफड़ों में एक्यूट रेस्पिरेटरी डी-स्ट्रेस सिंड्रोम भी देखने को मिला है। किडनी पर भी गंभीर असर हो रहा है।

ये हैं लक्षण

त्वचा पर दाने उभर आते हैं। बार- बार थकान होना, घबराहट होना, चैस्ट पेन, गंभीर परिस्थितियों में हार्ट फेल्योर, डायरिया, जोड़ों में दर्द आदि हो सकते हैं।

शरीर पर असर

वायरस अपनी संख्या बढ़ाने लगता है। ईसीजी का ड्यूरेशन बढ़ जाता है। एंटीबॉडीज की क्षमता घट जाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है। बैक्टीरियल निमोनिया हो सकता है।

इस बीमारी में हृदय की मांसपेशियों में सूजन जाती है। वायरस इन्फेक्शन से ऐसा होने पर इस बीमारी काे वायरल मायोकार्डिटीस कहते हैं। दिल में रक्त पंप करने की क्षमता घट जाती है। फेफड़े भी ढंग से काम नहीं कर पाते। जबकि सामान्य वायरल में बुखार आताहै, गले में खराश, थकान, सिरदर्द, जुकाम, कफ, डायरिया, पेट दर्द होता है।

सेंट्रल-साउथ अमेरिका में आते हैं ऐसे केस

इसबीमारी के सबसे ज्यादा केस सेंट्रल साउथ अमेरिका में मिलते हैं। वहां वायरल मायोकार्डिटीस होने की मुख्य वजह प्रोटोजोअन ट्राईपेनसोमा को माना जाता है।

...जैसा कि डॉ. वाय.एन. वर्मा और डॉ. संजय गांधी ने बताया।