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- \"परमात्मा को पहचानने से चेतना का जागरण\'
\"परमात्मा को पहचानने से चेतना का जागरण\'
श्रमणसंघीय महामंत्रीसौभाग्य मुनि ने कहा कि सभी आत्मा को परमात्मा से मिलाने की बात करते हैं, लेकिन जैन धर्म आत्मा को परमात्मा बनाने का चमत्कार दिखाता है। मानव ही अपने भीतर विद्यमान परमात्मा के स्वरूप को जागृत कर सकता है। परमात्मा को पहचानने पर ही हमारी चेतना का मूल स्वरूप जागृत होगा।
मुनिश्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ की ओर से पंचायती नोहरे में आयोजित अखिल भारतीय वीरवाल जैन समाज के 58 वें अधिवेशन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने अहिंसा स्थापना की। यही सभी गुणों का राजा और सभी आध्यात्मिक शक्तियों का केन्द्र है। किसी का दिल दुखाना और झूठ बोलना भी हिंसक है। हर प्राणी जीवित रहना चाहता है। परमात्मा की बनाई व्यवस्था में हम हिंसा की भावना लाकर अनर्थ करते हैं। समारोह के मुख्य अतिथि वीरेंद्र डांगी, विशिष्ट अतिथि हिम्मत सिंह बड़ाला, चम्पालाल वीरवाल, नेमी चन्द पोखरना, कवंरलाल सूयार, मनोहर लाल सूर्या, जगदीश प्रसाद वीरवाल थे। अध्यक्षता दिल्ली के आनन्द प्रकाश जैन ने की। समाज के रतनलाल ने समाज उद्भव से वर्तमान तक की रूपरेखा प्रस्तुत की।
समितियोंका गठन : सौभाग्यमुनि ने वीरवाल जैन समाज के बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ, साहित्य समिति, अभिनंदन समिति, भामाशाह सम्मान समिति, शिविर संचालन समिति, महिला विकास समिति, अर्थ समिति के गठन की अनुशंसा की। अधिवेशन में देशभर से सैकड़ों समाजजन शामिल थे।
नवपद ओली कल से
सेक्टर चार, जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जिनालय में नवपद ओली उत्सव मंगलवार को शुरू होगा। अध्यक्ष सुशील बांठिया ने बताया कि 2 अक्टूबर को सरस्वती पूजन, 4 को वीशस्थानक पूजन, 5 को स्नात्र महोत्सव, 6 को पालना उत्सव होगा।
नफरत वाले दिलों में नहीं बसते भगवान
टाउनहॉल में आयोजित नमोकार महामंत्र जाप्यानुष्ठान में आचार्य शांति सागर ने कहा कि दिल में नफरत को जगह मत दो। ऐसे दिलों में नारायण का वास नहीं होता है। जीवन में दुखों, परेशानियों का आना तो जीवन का हिस्सा है, लेकिन इनमें से हंसते हुए निकल जाना जीवन जीने की कला है। हमेशा याद रखना किसी की मजाक और दूसरों का पैसा उड़ानेे से पहले सोचना चाहिए। श्रावक प्रकाश सिंघवी ने बताया कि शांतिलाल नागदा, अरविंद चित्तौड़ा, सुमतिलाल दुदावत, चन्दनमल छाप्या, जनकराज सोनी पुण्यार्जक रहे।
अच्छा गुरु मिलना तपस्या का फल है
अंबामाता: महावीरसाधना