जजों ने बताया कि हालात चिंताजनक
नहीं आने के पीछे प्रशासनिक अफसरों के ये तर्क
पुलिस-प्रशासन को आना चाहिए था, क्योंकि...
बच्चोंके शोषण से जुड़े मामलों पर रोकथाम के लिए रविवार को बीएन कॉलेज सभागार में हाईकोर्ट सहित संभाग के 46 जजाें की मौजूदगी में हुई चार घंटे की संभाग स्तरीय कार्यशाला में संभागीय आयुक्त, कलेक्टर, आईजी और एसपी नहीं आए। जिले में हर साल करीब 80 हजार बाल शोषण से जुड़े मामले सामने आने के बाद भी प्रशानिक उच्चाधिकारियों की ऐसी कार्यशालाओं में गैरमौजूदगी पर जजों ने नाराजगी जताई।
हाईकोर्ट जज गोविंद माथुर और विजय विश्नोई की उपस्थिति में हुई कार्यशाला में जिला एवं सेशन न्यायाधीश रामचंद्र सिंह झाला ने बताया कि हमने संभागीय आयुक्त, कलेक्टर, आईजी और एसपी को आमंत्रित किया था, लेकिन कोई शामिल नहीं हुआ। चूंकि, बाल शोषण के मामले रोकने में सबसे बड़ा जिम्मा पुलिस-प्रशासन का होता है ऐसे में वे इन कार्यशालाओं में नहीं आएंगे तो अपराध कैसे रोके जा सकेंगे। प्रशासन के इस रवैये के बारे में हाईकोर्ट को लिखेंगे। अतिरिक्त जिला एवं सेशन न्यायाधीश प्रथम हरिओम शर्मा अत्री ने मंच से कहा कि बाल शोषण अपराध रोकने वाली सरकारी एजेंसी ही अगर ऐसे कार्यक्रम में भागीदारी नहीं निभाएगी तो ये अपराध कैसे रुकेंगे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से हुई कार्यशाला में चित्तौडगढ के डीजे अभय चतुर्वेदी, राजसमंद के भवानीशंकर कुमावत प्रतापगढ़ के पवन एन. चन्द्रा ने भी विचार व्यक्त किए। प्रशासन की ओर से एडीएम यासीन पठान, बाल कल्याण समिति के अधिकारी, चाइल्ड लाइन कई एनजीअो के प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद थे।
कार्यशाला में पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों के बैठने के लिए नेम प्लेट सहित कुर्सियां लगाई गई थीं।
यह दी सीख
कार्यशाला को लेकर अगर इन्वीटेशन आया है तो देखना पड़ेगा। हालांकि प्रशासन की ओर से एडीएम शामिल हुए थे। आशुतोषपेंढणेकर, कलेक्टर
> प्रशासन एक्जीक्युटिव बॉडी है।
> हर साल जिले में बाल शोषण के 80 हजार मामले सामने आते हैं।
> आदिवासी बेल्ट से बच्चों के यौन शोषण के मामले कोटड़ा और झाड़ोल के सबसे ज्यादा हैं।
> देश में सबसे ज्यादा बाल विवाह के मामले राजस्थान में।
कार्यशाला मे मौजूद राजस्थान हाई कोर्ट के जज विजय विश्नोई,गोविंद माथुर और उदयपुर डीजे रामचंद्र सिंह झाला।
सामंजस्य {हाईकोर्ट जज गोविन्द माथुर ने कहा कि ऐसे मामलों म