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तीन पंचायतों में ही बने टॉयलेट, प्रमुख शासन सचिव ने कलेक्टर से कहा

7 वर्ष पहले
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यह बड़े शर्म की बात है...

गंभीरता बरत रहे, हो रही मॉनिटरिंग

बैठक में ही दिख गया था झपकी लेते अफसराें का रवैया

हर ब्लॉक में सिर्फ एक समन्वयक

कई परिवारों को नहीं मिला फंड

देश : सिक्किम ही खरा उतरा

प्रदेश : 300 पंचायतों में ही हुआ निर्माण

केन्द्रसरकार के निर्मल भारत अभियान (एनबीए) के तहत उदयपुर में 2014-15 में जिला परिषद को 1 लाख 98 हजार टॉयलेट बनाने थे, लेेकिन अब तक सिर्फ 11 हजार 664 टॉयलेट ही बने हैं। यही नहीं, पंचायत समितियों द्वारा कई अाधे-अधूरे और बिना गड्ढे वाले टॉयलेट्स को ही जिले की प्रगति रिपोर्ट में शामिल कर दिया गया। उदयपुर की 467 ग्राम पंचायतों में से 3 पंचायतों में लक्ष्य के मुताबिक टॉयलेट बने हैं। पंचायतीराज प्रमुख शासन सचिव श्रीमत पांडे ने इस संबंध में उदयपुर कलेक्टर आशुतोष पेडणेकर को पत्र लिख कर कहा है-यह बड़े शर्म की बात है कि हम इतने समय में 10 प्रतिशत टॉयलेट भी नहीं बनवा पाए, जबकि इसको लेकर मुख्यमंत्री भी गंभीर हैं और घोषणा कर चुकी हैं। ऐसे तो अभियान पूरा कब होगा। गौरतलब है कि उदयपुर जिले में सराड़ा की ईंटाली ग्राम पंचायत को 2009 में, गोगुंदा की चोर बावड़ी ग्राम पंचायत को 2010 में, गोगुंदा की ही पड़ावली खुर्द ग्राम पंचायत को 2011 में खुले में शौच मुक्त घोषित किया था। तब से जिला परिषद ने 2014-15 की कार्य योजना में मावली और बड़गांव पंचायत समिति को खुले में शौच से मुक्त कराने का दावा किया था। इसमें करीब 20 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत भी हुआ था, लेकिन आधे टॉयलेट्स भी नहीं बन पाए हैं।

कहां बनाने हैं टायलेट ग्रामपंचायतों में एपीएल और बीपीएल परिवारों के घरों में के साथ सरकारी स्कूल और आंगनबाड़ी केन्द्रों में टायलेट बनाए जाने हैं।

}जिले का2007 से टारगेट : सातसाल में 4 लाख 88 हजार 489 टॉयलेट बनाने थे। अब तक 1 लाख 30 हजार टायलेट बनाए गए।

} वर्ष2014-15 का टारगेट : इससाल 1 लाख 98 हजार टॉयलेट में से मात्र 11 हजार 664 ही बने।

} कुल 22 करोड़ रुपए में से 176 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

तीन माह पूर्व यूनिसेफ की ओर से जिला परिषद में स्वच्छता मिशन को लेकर संभाग स्तरीय बैठक हुई थी। बैठक करीब 5 घंटे चली, जिसमें यूनिसेफ प्रशिक्षक टॉयलेट बनवाने, लोगों को स्वच्छता प्रति जागरूक करने के लिए बोल रहे थे। इस बीच कई अधिकारियों को झपकी लेने लगे थे। तब खुद मंच