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हमारे हरियाली के बागबां, इनसे गुलजार हैं बाग-बगीचे
हिरणमगरीउपनगरीय क्षेत्र में नगर निगम के कई पार्क बदहाल हैं, वहीं दूसरी ओर उसी क्षेत्र में एेसे भी पार्क हैं जिनकी कॉलोनीवासियों के प्रयासों से तकदीर बदल गई है। इन्होंने किसी की मदद का इंतजार किया और ही निगम के भरोसे रहे। बस ईमानदार प्रयास और मेहनत के दम पर इनके बगीचों में हरियाली लहलहाने लगी हैं। इस बदलाव के बागबां प्रोफेसर से लेकर गृहणियां तक बनीं हैं। हरियाली के हीरो बने इन लोगों की कहानियाें से और शहरवासियों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए।
शिखा चक्रवर्ती
गार्डन की देखरेख करते प्रोफेसर कायम अली खान।
चट्टानों पर खिलाए फूल
जमीनको खोदने पर पता चला कि तीन से चार इंच नीचे चट्टा ने हैं, लेकिन प्रोफेसर खान के इरादे कहां डगमगाने वाले थे। उन्होंने कुछ लेबर लगाकर पूरी जमीन खुदवाई। वहां पौधे लगाए और चट्टानों से निकले पत्थर से गार्डन के बीच रास्ते क्यारियों की बाउंड्री बना दी।
हिरण मगरी सेक्टर चार में स्थित निगम का पार्क आदर्श विकास समिति के प्रयासों से आज सुंदर स्वरूप लिए है। इसी जगह कभी गहरा गड्ढा था। जिसमें कभी गंदगी के चलते खड़ा रहना भी मुश्किल होता था। विकास समिति के अविनाथ जैन ने बताया कि उनके पिता डाॅ.अजित कुमार जैन पड़ोसी मुन्नासिंह जादौन ने प्रयास शुरू किए। समिति सदस्यों ने आर्थिक सहयोग से विकास का काम हाथ में लिया। दिनेश सिंह जगपाल सिंह चौहान ने बताया कि पार्क निगम से गोद लिया गया गया है, देखरेख समिति करती है।
सेक्टर चार में स्थित पूजा पार्क कभी उजाड़ था। कॉलोनी वासियों के प्रयासों से आज वही पार्क कॉलोनी की पहचान बन गया है। उदयपुर विश्वविद्यालय कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी समिति ने निगम से यह पार्क गोद ले रखा है। समिति की शिक्षा चक्रवर्ती ने बताया कि यह पार्क कभी उजाड़ था। प्रोफेसर वीवी शर्मा ने प्रयास शुरू किए। बाद में समिति ने इस काम को आगे बढ़ाया। चक्रवर्ती ने बताया कि इसकी देखरेख में महिलाओं की भी अहम भूमिका रहती है। वे किचन की तरह पार्क का पूरा ख्याल रखती हैं।
सेक्टर पांच स्थित गायत्री नगर पार्क। कहने का उपनगरीय क्षेत्र की कॉलोनी के बीच का पार्क है,मगर इसकी हालत अच्छी नहीं है। इसी पार्क परिसर में एक सामुदायिक भवन भी बना हुआ है। उसके बावजूद पार्क में बच्चों के खेलने के लिए झूले नहीं है। पानी नहीं मिलने से घास थी वो भी सुख चुकी है। कॉलोनी आगे आने की पहल करंे तो पार्क भी सुंदर नजर सकता है।
सुखाडिय़ा युनिवर्सिटी में 4 बीघा जमीन जहां कभी झाड़ हुआ करते थे। यहीं के भूगोल विभाग के प्रोफेसर कायम अली खान ने 4 साल में यहां 5 हजार से अधिक पौधे लगाकर जमीन को गुलजार कर दिया है। प्रोफेसर खान बताते हैं उनकी माता पिता की स्मृति में परिवार कोई पुण्य कार्य करना चाहता था। खान ने अपनी कर्मस्थली में ही कुछ करने का सोचा। इस तरह दिसंबर 2010 में उन्होंने बंजर भूमि को गुलजार करने की ठानी। खान जहां भी जाते हैं वहां से कोई नया पौधा जरूर लाते हैं। वे केरल से लाए इंसुलिन प्लांट के बारे में बताते हैं कि इसकी पत्तियां डायबिटीज के मरीजों के लिए अच्छी हैं। वे अलीगढ़ से साइकस लाए, यहां इसी साइकस से 200 पौधे बढ़ा लिए हैं। काजू, शिमला मिर्च, सफेद बैंगन, जेबी संतरा, रास्पबैरीज के साथ ही गुलाब की 15 वेरायटियां हैं। अप्रेल में पिता की बरसी पर वे सरकारी स्कूलों में पौधे बांटेंगे।
150बच्चे आते श्रमदान करने, प|ी लाती बच्चों के लिए खाना : प्रोफेसरखान ने बताया कि इस मुहिम से कॉलेज के करीब 150 बच्चे जुड़े हैं। सभी अलग अलग बैच में आकर श्रमदान करते रहते हैं। ऐसे में इनकी प|ी बच्चों के लिए खाना बनाकर लाती हैं बच्चों ने मिलकर सीमेंट से 5 कुंड बनाए हैं, जिसमें 6-7 रंगों की वाटर लिली कमल के फूल हैं।
मल्लातलाई क्षेत्र के गरीब नगर में स्थित मगरी स्कूल पार्क कहने को आबादी के बीच का पार्क है, मगर इसकी स्थिति ठीक नहीं है। इस पार्क में निगम की ओेर से बच्चों के लिए एक खिलौना लगवाया गया है वह भी ठीक हालत में नहीं है। क्षेत्रीय पार्षद, क्षेत्रवासी निगम मिलजुलकर प्रयास करे तो इस पार्क की तस्वीर भी बदल सकती है।