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एक छात्रा आगे आई तो व्यवस्था पर उठा सवाल

7 वर्ष पहले
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उदयपुर/जोधपुर. भास्कर ने विशेषज्ञों से जानकारी जुटाई तो पता चला कि माइनिंग ब्रांच में 15 वर्षों में पहली बार किसी छात्रा ने प्रवेश के लिए आवेदन किया। कॉलेजों में गल्र्स को एडमिशन प्रतिबंधित तो बताया जाता है लेकिन इसका लिखित में कोई नियम ही नही है। टेक्निकल एजुकेशन के डिप्टी डायरेक्टर एमआर पुरोहित के अनुसार प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के एडमिशन बोर्ड का यह साझा फैसला है। सभी सरकारी निजी इंजीनियरिंग कॉलेज संबद्ध होते हैं, अत: वे भी लड़कियों को प्रवेश नहीं देते हैं। आरपीईटी में छात्राओं के लिए इन सीटों के लिए ऑप्शन ही नहीं होता। एमबीएम इंजीनियरिंग के प्रोफेसर डॉ. सुनील परिहार के अनुसार राजस्थान के बाहर कुछ स्थानों पर नागपुर, धनबाद गुजरात के कुछ कॉलेजों में माइनिंग में छात्राओं को प्रवेश की अनुमति है।

अंडरग्राउंड माइनिंग के अलावा भी जॉब्स

माइनिंग इंजीनियर्स माइन डिजाइनिंग, माइन प्लानर, हेल्थ एंड सेफ्टी मैनेजर, माइन वेंटिलेशन इंजीनियर, कंसल्टिंग इंजीनियर्स, सेल्स एंड ऑपरेशन इंजीनियर, माइनिंग इनवेस्टमेंट एनालिस्ट का कार्य भी कर सकते हैं।

इन क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं

>सेंट्रल माइन्स एंड फ्यूल रिसर्च
> डिपार्टमेंट ऑफ माइन्स एंड जियोलॉजी
> टीचिंग इन माइनिंग इंजीनियरिंग एंड डिप्लोमा कोर्सेज

पहले सिलेबस में भी लिखा होता था

करीब 7-8 वर्ष पहले तो सिलेबस में लिखा हुआ होता था कि ‘फीमेल कैंडीडेट्स आर नॉट अलॉउ इन माइनिंग’।

प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में 60 सीटें

माइनिंग इंजीनियरिंग की प्रदेश में 240 सीटें है। सरकारी कॉलेजों में 60 शेष में 180 सीटें हैं। तीन प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में है। इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, कोल इंडिया, ओएनजीसी, एचसीएल, नाल्को, टाटा स्टील, रिलायंस आदि माइन इंजीनियर्स के लिए भर्ती करती है। कैंडीडेट्स एनआईटी बीएचयू जैसे नामी इंस्टीट्यूट्स में जूनियर रिसर्च फे लो के तौर पर भी कार्य कर सकते हैं।