उदयपुर. शिल्पग्राम के दर्पण सभागार में जारी राजस्थानी नाट्य समारोह में शनिवार को नाटक ‘भोलो भेरू’ में भोले और चालाक मित्रों की लोक कथा के मंचन ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया। कथानक के अनुसार मुख्य पात्र अपने विवाद को सुलझाने भैरू की शरण में जाते हैं। कहानी कालिया और भैरिया नामक दोस्तों से शुरू होती है। भेरिया भोला है, वहीं कालिया चालाक। कर्ज उतारने दोनों शहर जाते हैं और कठपुतली प्रदर्शन कर रुपए जुटाते हैं।
गांव लौटते समय रात्रि विश्राम के दौरान रुपयों को जमीन में गाड़ते हैं। जो सुबह नहीं मिलता। दोनो परस्पर शक करते है। गांव में भैरू मंदिर में जाकर गुहार लगाते हैं, जहां इस समस्या का समाधान होता है। स्व. निर्मोही व्यास की कथा पर आधारित एवं सुधेश व्यास द्वारा निर्देशित इस नाटक ने समाज के अच्छे बुरे लोगों से सावधान रहने आस्थाओं और परंपराओं के प्रति जागृति पैदा करने का प्रयास किया। रविवार को नाटक ‘सफेद जवारा’ का मंचन होगा।