\"विचार बेकार और अर्थहीन नहीं\'
‘नमोकार मंत्र लगे प्राणों से प्यारा...’
मुनिनिपुण र| विजय ने कहा कि हमारी सोच और हमारी विचारधारा ही हमारे जीवन का प्रेरक तत्व है। कोई भी विचार बेकार और अर्थहीन नहीं होता। हर विचार जीवन में बीज का काम करता है।
मुनिश्री शहर के अंबामाता स्थित महावीर साधना स्वाध्याय समिति में बुधवार को आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सोच दो तरह की होती है, नकारात्मक और सकारात्मक। दुनिया में तमाम सुविधाएं, संचार साधन आदि जो देख रहे हैं, वह रचनात्मक सोच का परिणाम है। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक समाज के महिला-पुरुष शामिल हुए।
सेक्टर11 आदिनाथ भवन
आचार्यकनक नंदी ने कहा कि परमात्मा अतीन्द्रिय स्वभाव है। परमात्मा के स्वभाव से विपरीत क्रम से ज्ञान में प्रवृत्ति करने वाली इंद्रियां हैं। उनके द्वारा जानने से जो उल्लंघन कर गए हैं अर्थात जिस परमात्मा के पराधीन ज्ञान नहीं है।
पंचायतीनोहरा
श्रमणसंघीय महामंत्री सौभाग्य मुनि ने कहा कि जो परिवर्तन भौतिकता को नष्ट भ्रष्ट कर दे, वह परिवर्तन सर्वनाश स्वरूप होता है। व्यक्ति के जीवन में भी यदि ऐसा परिवर्तन आए तो वह मानव मानव नहीं रहकर दानव भी बन सकता हैं। मानव जब जन्म लेता है कुछ बड़ा होता है वहां तक वह अनेक अच्छाइयों का भंडार बना रहता है।
नमोकार मंत्र जाप महोत्सव की पूर्व संध्या पर बुधवार को नगर निगम परिसर में सभा में शामिल श्रावक समाज की महिलाएं। इनसेट: संबोधितकरते आचार्च शांतिसागर। फोटो: भास्कर