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प्रताप धन मुर्गी जापानी बटेर पालन के लिए बैंक देंगे लोन

7 वर्ष पहले
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साधारणमुर्गियों की तुलना में तीन गुना अधिक अंडे देने वाली प्रजाति की प्रताप धन मुर्गियां तथा विदेशी पर्यटकों को लजीज लगने वाले जापानी बटेर (जापानी क्वेल) पालन को स्वरोजगार के रूप में प्रशासन ने हरित धारा योजना के अंतर्गत लागू करने की घोषणा की है। ये काम शुरू करने के लिए बैंक तथा वित्तीय संस्थान आशार्थियों को प्रशासन की सिफारिश पर ऋण उपलब्ध कराएंगे। महाराणा प्रताप कृषि विश्वविद्यालय में तैयार की गई प्रताप धन मुर्गी की उन्नत नस्ल तथा कृषि विकास केंद्रों के सहयोग से गांवों में तैयार हो रहे जापानी बटेर को व्यवसाय का रूप देने के लिए किसान युवकों को बैंकों तथा नाबार्ड के जरिए लोन दिलाया जाएगा। किसान युवकों को मुर्गी, बटेर या चिंचिला खरगोश की हाईब्रिड नस्ल उपलब्ध कराने के साथ नर्सरी तथा मार्केटिंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिला कलेक्टर आशुतोष पेडणेकर ने गुरूवार को कृषि विभाग की आत्मा योजना (एग्रीकल्चर टेक्नोलोजी मैनेजमेंट एजेंसी) की बैठक में कृषि, बागवानी, डेयरी, पशु पालन, सहकारिता, बैंक, नाबार्ड के अधिकारियों को संयुक्त अभियान के रूप में काम करने के निर्देश दिए।

कृषि में करेंगे आईटी का उपयोग :

कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि हरित धारा याेजना के तहत सब्जी उत्पादन, बागवानी तथा पशु पालन को उन्नत बनाने के लिए सूचना प्रोद्योगिकी का इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा कि अब ग्रामीण युवक एंड्रायड फोन इस्तेमाल करने लगे हैं। युवा किसान फसल में कीट लगने पर एप्स के जरिए फोटाे भेज सकते हैं। कृषि वैज्ञानिक या पशु चिकित्सक उसका उपचार एप्स के जरिए सुझा सकते हैं।