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पांच सालों में ऐसे घटे-बढ़े सोना चांदी

7 वर्ष पहले
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एमसीएक्स पर गोल्ड, सिल्वर में भरोसा कम

भविष्य के लिए ज्वेलरी के बजाए प्योर गोल्ड फायदेमंद

चांदी

सोना

सोने-चांदीकीघटती कीमतों को लेकर यदि आप भविष्य को देखते हुए इन्हें खरीदने का मन बना रहे हैं तो ज्वेलरी के बजाए प्योर गोल्ड (स्टैंडर्ड) और सिल्वर (999) आपको ज्यादा फायदेमंद रहेगा। री-सेल करने पर कुछ मामूली चार्ज काटकर लगभग पूरा पैसा रिर्टन मिल सकेगा। इसके अलावा आप चाहें तो इससे उस समय की फैशन, डिजाइन और डिमांड के अनुसार अपनी पसंद की ज्वेलरी भी बनवा सकते हैं। वहीं आप भविष्य की प्लानिंग के हिसाब से जेवराती सोने से बनी ज्वेलरी खरीदेंगे तो उसकी रीसेल वेल्यू आपको पूरी नहीं मिलेगा, क्योंकि 10 से 15 प्रतिशत तक ज्वेलरी का मेकिंग लेबर चार्ज काटकर पेमेंट किया जाता है। बाजार में सोने का एक किलो का बार 100 से 10 ग्राम तक के बिस्किट उपलब्ध हैं। चांदी की 30 किलो की सिल्ली 1 किलो, 500 ग्राम साइज में बार उपलब्ध है।

(सर्राफा एसोसिएशन अध्यक्ष इंदर सिंह मेहता, उपाध्यक्ष संजय भोपावत, मराठा कारीगर दत्तात्रेय मराठा, बंगाली कारीगर एसोसिएशन के दुलाल बेरा आदि से बातचीत के आधार पर रिपोर्ट)

पिछले छह माह में सोने और चांदी की लगातार गिरती कीमतों और अच्छे रिटर्न नहीं मिलने के कारण अब सोने और चांदी पर निवेशकों का भरोसा कम हो गया है। जहां पहले 70 फीसदी इनमें निवेश किया जाता था, अब घटकर यह 30 फीसदी रह गया है।

ये है ज्वेलरी मेकिंग का चार्ज

ऐसे बदला ट्रेंड

सर्राफा बाजार में सोने और चांदी के भाव कम होने से कारोबार 25 से 30 फीसदी तक बढ़ गया है। शहर में पहले रोजाना 5 से 7 किलो बिकता था, जो बढ़कर अब 8 से 10 किलो हो गया है। इसी तरह चांदी 150 से 200 किलो प्रतिदिन हो गई।

25-30% बढ़ा कारोबार

सोने और चांदी की कीमतों में आई भारी कमी के चलते शहर में खरीदारी का ट्रेंड भी बदल गया। पहले जहां 60 फीसदी शहरवासी लाइटवेट ज्वेलरी की खरीदारी किया करते थे। अब यह रेशो बदलकर 60 फीसदी हैवीवेट ज्वेलरी हो गया है। बाजार में खरीदारी करने वाले ग्राहक अब 2 से 3 ग्राम ज्वेलरी की बजाय 5 से 10 ग्राम की ज्वेलरी पर शिफ्ट हो गए हैं। क्योंकि ग्राहकों जिस बजट में पहले लाइटवेट ज्वेलरी मिलती थी, अब उसी में हैवीवेट ज्वेलरी मिलने लगी हैं। इसी कारण अब व्यापारी भी अपने हैवीवेट ज्वेलरी का ज्यादा स्टॉक रखने लगे हैं।

सर्राफा बाज