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झीलों की सुरक्षा के लिए जरूरी है कानूनी संरक्षण

7 वर्ष पहले
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उदयपुर. मुख्य न्यायाधीश सुनील अंबवानी ने उदयपुर की झीलों की सुरक्षा के लिए कानूनी संरक्षण की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि झील किनारे क्षेत्रों में विकास के साथ पर्यावरण को भी बैलेंस करना होगा। माउंट आबू के ईको टूरिज्म संरक्षण के लिए कस्बे को नो कंस्ट्रक्शन जोन घोषित किया गया है।

मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि उदयपुर की झीलों के किनारे निर्माण पर प्रतिबंध एवं इससे प्रभावित लोगों को हो रही दुविधाओं से वे परिचित हैं। वरिष्ठ न्यायाधीश इस मुद्दे को लेकर संवेदनशीलता के साथ काम कर रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश ने अपना मत प्रकट किया कि सिर्फ विकास को महत्व दिया जाए और पर्यावरण संरक्षण को नजरंदाज कर दिया जाए तो झीलों, तालाबों, नदियों को बचाना असंभव हो जाएगा। वे विकास के विरोधी नहीं हैं मगर निर्माण पर्यावरण में बैंलेंस करना जरूरी है। मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि माउंट आबू को उन्होंने नो कंस्ट्रक्शन टाउन घोषित कर सरकार को आदेश दिए हैं कि स्वीकृति नियमों के विपरीत हुए निर्माण हटा दिए जाएं। मुख्य न्यायाधीश अंबवानी गुरूवार रात साढ़े 7 बजे जोधपुर से सड़क मार्ग से सपरिवार उदयपुर पहुंचे।
सर्किट हाउस में डीजे रामचंद्र सिंह झाला, सीजेएम सुशील कुमार पाराशर, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव नीरज भारद्वाज तथा न्यायिक अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। जिला बार के अध्यक्ष भरत जोशी, पूर्व अध्यक्ष शांति लाल चपलोत, शांति लाल पामेचा, रमेश नंदवाना, गौतम लाल सिरोया, बार उपाध्यक्ष अनिल पालीवाल, महासचिव गगन सनाढ्य ने मुख्य न्यायाधीश का पहली बार लेकसिटी आने पर स्वागत किया।