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मूर्तियां जब्त कर पुलिस यह पता नहीं लगा पाई कि कब, कहां से चोरी हुईं

7 वर्ष पहले
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उदयपुर. सुखेर थाना क्षेत्र के चीरवा स्थित अद्भुत बाबा के आश्रम से मिली प्राचीन प्रतिमाएं चोरी होने की पुष्टि होने और ऐसी कई प्रतिमाओं की तस्करी होने के मामले में पुलिस जांच आगे नहीं बढ़ा पाई हैं। बड़ी कार्रवाई का दावा करने वाली पुलिस एक महीने बाद भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। इससे आरोपियों को बचने का मौका मिला। पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट के आधार पर यह तो साबित होता है कि आश्रम से मिली मूर्तियां एक जगह के बजाए अलग-अलग हिंदू और जैन मंदिरों की हैं। लेकिन पुलिस यह पता नहीं कर सकी कि यह मूर्तियां कहां से और कब चाेरी की गईं थी। सात दिन की रिमांड पर भी पुलिस बाबा से कोई जानकारी नहीं जुटा सकी। कॉल डिटेल से भी पुलिस कोई तफ्तीश नहीं कर पाई है।

जांच चल रही है। मूर्ति तस्करी के संबंध में पुलिस चैनल के जरिए वेरिफाई कराया गया था, बाबा ने जो मूर्तियां मुम्बई भेजी थीं, वे वहां के मंदिरों में स्थापित हैं, उनकी तस्करी नहीं हुई थी। बाबा ने हिंदू और जैन आश्रम में प्रतिमाएं को रखकर खुर्द-बुर्द किया। इस संबंध में बाबा से पूछताछ में ज्यादा जानकारी नहीं मिली सकी है। अजयपाल लांबा, एसपी

20 अगस्त पुलिस ने जैन मंदिर के पास आश्रम से बेशकीमती प्राचीन प्रतिमाओं की चोरी के आरोप में वहां रह रहे बाबा इन्द्र गंज, ग्वालियर निवासी नरेन्द्र (60) पुत्र गुमान मल बच्छावत (जैन) को गिरफ्तार किया था। नरेन्द्र बच्छावत ने खुद को उदयपुर में अद्भुत बाबा और र| सूरी के नाम से प्रचारित कर रखा था। आश्रम से 48 प्राचीन मूर्तियां, कलाकृतियां, आईपैड, महंगे मोबाइल, एयरगन, नकली कार्बाइन सहित संस्था के दस्तावेज जब्त किए। अगले दिन आश्रम से दस मूर्तियां और मिली थीं।

अद्भुत बाबा की गिरफ्तारी से पहले ही पुलिस को उसकी परिचित महिला की जानकारी थी। बाबा के कारनामों में यह महिला बराबर की भागीदार मानी गई है। पुलिस ने बाबा की गिरफ्तारी तो की, लेकिन महिला पर नजर नहीं रखी, इससे महिला को भागने का मौका मिल गया। एक महीने बाद भी पुलिस महिला को गिरफ्तार नहीं कर सकी। महिला से पूछताछ तो दूर उसके घर की तलाशी भी नहीं हुई है। बाबा के ड्राइवर से भी पुलिस कोई अहम साक्ष्य नहीं जुटा सकी है।