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वित्तीय ज्ञान वालों को मिले एमडी की जिम्मेदारी
उदयपुर| सहकारीबैंकों में वित्तीय ज्ञान रखने वालों को ही प्रबंध निदेशक (एमडी) की जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। सहकारी बैंकों को एक वित्तीय बैंकिंग संस्थान के रूप में चलाने के लिए सरकार सहकारी प्रशासन को सक्षम योग्य अधिकारी लगाने चाहिए। ये बात प्रदेश बैंक एम्पाइज यूनियन के प्रांतीय उपमहासचिव एवं ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रांतीय महासचिव सूरजभान सिंह आमेरा ने सहकारी साख समितियां एम्पलाइज यूनियन के जिला सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि कही। उदयपुर, राजसमंद जिले के सहकारी पैक्स कर्मियों का यह सम्मेलन रविवार को प्रतापनगर स्थित कोऑपरेटिव यूनियन सभागार में आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि सहकारी बैंकों में उच्च प्रबंधन की जवाबदेही पारदर्शिता की नीति तय की जानी चाहिए। इन बैंकों की गिरती आर्थिक व्यवस्था का कारण अकुशल प्रबंधकीय व्यवस्था, वसूली प्रति उदासीनता और राजनैतिक हस्तक्षेप है। सहकारी बैंकों को सीआर एआर मापदंडों की पालना के लिए सरकार द्वारा 100 करोड़ हिस्सा राशि 22 करोड़ रुपए ग्रांट इन एड के रूप में अतिरिक्त पूंजी उपलब्ध कराने की सख्त दरकार है। सम्मेलन में जिले की 200 ग्राम सेवा सहकारी समितियों मिनी बैंकों में कार्यरत व्यवस्थापक, सहायक व्यस्थापक सेल्समैन ने भाग लिया।
रिक्त पद भरने, नियमित डीपीसी करने की मांग
आमेराने सहकारी बैंकों में रिक्त पदों को भरने और नियमित डीपीसी करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि सहकारी बैंकिंग व्यवस्था की नींव मजबूत करने वाले पैक्स कर्मी सुरक्षित रोजगार, नियमित वेतनमान चिकित्सा सुविधा जैसी सेवाओं से महरूम है। बैंकों के अधिकारी कर्मचारियों को केन्द्र राज्य कर्मचारियों की तरह सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का लाभ मिलना चाहिए।