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उदयपुर में गाड़ियां

7 वर्ष पहले
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उदयपुर. ढाई साल में करीब 6 हजार कार-जीपों का रजिस्ट्रेशन करने के साथ खरीदारों से पार्किंग होने के शपथ-पत्र लेने वाला प्रादेशिक परिवहन कार्यालय (आरटीओ) अब छह दिन में इनका सच-झूठ जांचेगा। हाईकोर्ट के आदेश के बाद से ही शपथ पत्र लेने की खानापूरी रहा विभाग लोकायुक्त की सख्ती पर जागा है।

इसके तहत शहर की कॉलोनियों, गलियों में घरों के बाहर होने वाली बेतरतीब पार्किंग वाले वाहनों की लिस्ट तैयार की जा रही है। टीम जांचेगी कि शपथ पत्र देने वाले कितने वाहन मालिकों के पास पार्किंग की व्यवस्था है। इसकी फोटोग्राफी भी होगी। जिन लोगों ने यह घोषणा झूठी की है, उनके वाहनों का रजिस्ट्रेशन कैंसिल किया जाएगा।

हाईकोर्ट पहले ही कह चुका

यहीआदेश हाईकोर्ट ने मार्च 2012 में दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि 30 फीट से कम चौड़ी सड़क पर पार्किंग नहीं होनी चाहिए। विभाग द्वारा चारपहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन तभी किए जाएं, जब वाहन मालिक पार्किंग की जगह होने का शपथ पत्र दे, लेकिन आरटीओ के अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

यह कहा है लोकायुक्त ने

लोकायुक्तएस.एस. कोठारी ने मंगलवार को सड़कों पर वाहन खड़े करने की आदत जिम्मेदार एजेंसियों की नजरअंदाजी पर स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया। जयपुर का उदाहरण लेते हुए उन्होंने कहा-शहरों की सड़कों पर घरों के बाहर पार्क किए जा रहे वाहनों के रजिस्ट्रेशन सप्ताहभर तक अभियान चला कर रद्द किए जाएं।

विभाग ने नियम बनाया, लागू नहीं करवा सका : 30अप्रैल, 12 को विभाग ने वाहन रजिस्ट्रेशन को लेकर नया नियम बना दिया और प्रदेश के सभी आरटीओ और डीटीओ अधिकारियों को उसे लागू करने के निर्देश भी दिए गए। नियमानुसार वाहन का रजिस्ट्रेशन तभी होना था, जबकि वाहन मालिक पार्किंग स्थल की जानकारी दे। फोर व्हीलर मालिक को शपथ-पत्र देकर बताना था कि उसके पास गाड़ी खड़ी करने की जगह है।

^पार्किंग के शपथ पत्रों की सत्यता जांचेंगे। हलफनामा देने के बाद घर के बाहर पार्क होने वाले वाहनों को चेक किया जाएगा। रात्रि गश्त वाली पुलिस की भी मदद ली जाएगी। कानसिंहपरिहार, जिलापरिवहन अधिकारी, उदयपुर

फतहपुरा चौराहा-देवाली रोड (बाएं) और सहेली नगर क्षेत्र में सड़क पर पार्क की गई कारें। फोटो: भास्कर

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हजार सेज्यादा जीपों का रजिस्ट्रेशन पिछले साल तक

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