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क्रोध और चिंता नहीं है तो दिन-रात मंगलमय
मुनिनिपुण र|विजय ने कहा कि जीवन के दो प्रबल शत्रु है, क्रोध और चिंता। दोनों भाई-बहन की तरह जीवन में साथ रहते हैं। क्रोध से शांति और चिंता से सौंदर्य का नाश, क्रोध से विवेक और चिंता से मनोबल का नाश। दोनों ही दिलो-दिमाग के दुश्मन है, रोगों के जनक है। जिनके जीवन में क्रोध और चिंता नहीं है, उनके दिन-रात मंगलमय होते हैं।
मुनिश्री अंबामाता स्थित महावीर साधना स्वाध्याय समिति में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि क्रोध से व्यक्ति अपने आपे में नहीं रहता, ऐसे में स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और आपसी रिश्तों में खटास आती है। चिंता मानसिक संतुलन को आघात पहुंचाती है, स्वभाव को चिड़चिड़ा बनाती है। व्यवसाय को प्रभावित करती है। दिमागी शांति और कॅरियर, दोनों ही चोट खाते हैं। क्रोध से दूसरों पर और चिंता से खुद पर घातक प्रभाव पड़ता है।
पंचायती नोहरा : श्रमणसंघीय महामंत्री सौभाग्य मुनि ने कहा कि यह सत्य है जीवन जीने के लिए अनेक साधनों की जरूरत पड़ती है, लेकिन अपनाए गए साधन पर चिंतन करना चाहिए। अनन्त वस्तुएं है, लेकिन सभी उपयोगी नहीं होती। किसी चीज को पाने का मन में आवेग इतना तीव्र होता है कि व्यक्ति अपने शरीर के सामर्थ्य को भूलकर वस्तु को पाना चाहता है। जब भारतीय संस्कृति चरम पर थी तब पाश्चात्य संस्कृतियों का अस्तित्व नहीं था।
आराधनाभवन, मालदास स्ट्रीट : मुनिश्रीके सानिध्य में आयोजित कार्यक्रमों की कड़ी में आयंबिल ओली का आयोजन होगा। श्री जैन श्वेतांबर मुर्तिपूजक की ओर से इसकी तैयारियां की जा रही है। गजेंद्र नाहटा ने बताया कि आयोजन में श्रावक-श्राविकाओं की मौजूदगी रहेगी।
आदिनाथभवन, सेक्टर-11 : आचार्यकनक नंदी ने कहा कि संसार की सभी ज्ञान-विज्ञान विधाओं में आध्यात्मिक विद्या है। इसका शोध-बोध मिलने पर हम भौतिक विज्ञान से लेकर सूक्ष्म जीव विज्ञान का रहस्य ज्ञात कर लेते हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से हर जीव अनन्त ज्ञान, सुख, बल आदि गुणों का स्वामी है।
संतों के मुख से