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हिंदी को अंतर्मन से अपनाकर बनाएं राजकाज की भाषा
उदयपुर| हिंदीजन-जन की भाषा है, इसे दैनिक कामकाज में लाएं। इसे जब तक अंतर्मन से नहीं अपनाएंगे, यह राजकाज की भाषा नहीं बन पाएगी। कंप्यूटर युग तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे प्रगति के मार्ग पर हिंदी को भी उतना ही सम्मान मिले, जितना अंग्रेजी को मिलता है।
ये विचार बिड़ला फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. के.के. शर्मा ने व्यक्त किए। वे कर्मचारी भविष्य निधि संगठन उपक्षेत्रीय कार्यालय में हुए हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। यहां 1 से 15 सितंबर तक हिंदी पखवाड़े का आयोजन किया गया था। विशिष्ट अतिथि पुणे क्षेत्रीय कार्यालय के आयुक्त (द्वितीय) हनुमान प्रसाद हिंदी विषय विशेषज्ञ शिक्षिका उषा जांगिड़ थीं। अध्यक्षता क्षेत्रीय आयुक्त अरुण कुमार ने की। उन्होंने कहा कि ईपीएफओ जरूरतमंद श्रमिकों, कर्मचारियों से जुड़ा विभाग है। उनकी भावनाओं से जुड़ने के लिए हिंदी में कामकाज कर, उन्हें सूचनाएं भी हिंदी में ही दी जाए। शाम को सांस्कृतिक आयोजन हुआ, जिसमें रविकांत सिंह, वीरेश पोखर, मदन लाल दमामी आदि ने प्रस्तुतियां दी। सहायक आयुक्त पी.आर. जैन ने हिंदी पखवाड़े का विवरण दिया। एस.सी. मीणा ने धन्यवाद दिया। संचालन जी.एल. नागदा ने किया।
श्रेष्ठप्रतिभागियों को किया पुरस्कृत: समारोहमें ‘विचार प्रतियोगिता’ हुई, जिसमें प्रतिभागियों ने ‘हिंदी को राजकाज की भाषा के रूप में लागू करें’ विषय पर पक्ष-विपक्ष में विचार रखे। इसमें विभोर अरोड़ा प्रथम, जी.एल. नागदा द्वितीय, मदन चंडालिया तृतीय रहे। हिंदी पखवाड़े में हिंदी टिप्पणी-आलेखन प्रतियोगिता में प्रथम अमित माथुर, द्वितीय सुनिल कुमार वर्मा, तृतीय सुनील जैन, निबंध प्रतियोगिता में प्रथम अनिल जैन, द्वितीय अजय तिवारी, तृतीय सुनील बारबर रहे। अंतर अनुभागीय शील्ड प्रतियोगिता का पुरस्कार सूचना का अधिकार शाखा को दिया गया।
निबंधप्रतियोगिता हुई
मीरागर्ल्स कॉलेज के सेमिनार हॉल में कविता पाठ एवं निबंध प्रतियोगिता हुई। निबंध प्रतियोगिता में ममता परमार प्रथम रही। अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. सविता जोशी ने की।
नंदवानाऔर भट्ट सम्मानित
साहित्यमंडल की ओर से हिन्दी लाओ-देश बचाओ\\\' कार्यक्रम में 30 हिन्दी सेवियों को सम्मानित किया गया। उदयपुर के साहित्यकार डॉ. लक्ष्मी नारायण नंदवाना और डॉ. प्रमोद भट्ट को साहित्य मंडल की हिन्दी भाषा भूषण\\\' की मानद उपाधि से सम्म