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पुलिस ने इतना टॉर्चर किया कि युवक को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था
गुलाबबाग मार्ग पर ग्रीन व्यू होटल के मालिक गिरधारी लाल भंडारी की 11 जुलाई 2000 की रात गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने छह दिन बाद 17 जुलाई को पाठों की मगरी निवासी नकुल सिंह भाटी को आरोपी मानकर हिरासत में लिया था। भाटी को अंबा माता नाई थाने में पुलिस के उच्चाधिकारियों ने बुरी तरह से टाॅर्चर किया था। बेरहमी से पिटाई के साथ उसे अपराध कबूल करने के लिए कई मानसिक यातनाएं दी गईं। भाटी को जबरन हिरासत में रखने के खिलाफ शहर के राजपूत समाज द्वारा विरोध करने पर पुलिस कस्टडी से मुक्त किया गया था। उसे गंभीर घायल हालत में एमबी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। घटना के तुरंत बाद नकुल के पिता हरिसिंह भाटी ने तत्कालीन एसपी मोहन लाल लाठर, एएसपी संजीव नार्जरी, इंस्पेक्टर रिछपाल सिंह जाखड़, सब इंस्पेक्टर जितेंद्र आंचलिया एएसआई भंवर सिंह के खिलाफ भूपालपुरा थाने में मामला दर्ज कराया था। छह साल तक जांच चलने के बाद पुलिस ने अधिकारियों का अपराध नहीं बनता कहते हुए एफआर लगा दी थी। वर्ष 2006 में न्यायिक मजिस्ट्रेट दक्षिण 2 ने पांचाें पुलिस अधिकारियों को दोषी मान प्रसंज्ञान लेने के आदेश दिए थे। इसके बाद मुकदमा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में चला गया था। अदालत ने 22 दिसंबर 2012 को पांचों अधिकारियोें को डिस्चार्ज करने के आदेश दिए। अदालत ने सीआरपीसी की धारा 197 का हवाला देते हुए आदेश में लिखा था कि ड्यूटी का निर्वाह करते अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने से पूर्व राज्य सरकार की अनुमति लेनी चाहिए थी। अनुमति नहीं लिए जाने से अदालत ने केस डिस्चार्ज कर दिया था। पीड़ित नकुल सिंह भाटी के पिता हरिसिंह भाटी ने अधिवक्ता के जरिए सीजेएम के निर्णय के खिलाफ सेशन कोर्ट में निगरानी दर्ज कराई थी, जिसमें पांचों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की गुजारिश की गई। राज्य सरकार की ओर से भी निगरानी पेश की गई, जिसमें एएसआई भंवर सिंह भाटी के अलावा अन्य चार के खिलाफ मुकदमा चलाने की अपील थी।
एयरलाइंस डूब रही ...
जबकिजेट एयरवेज, स्पाइसजेट, गो एयर और इंडिगो के पैसेंजर लोड फैक्टर में कमी दर्ज की गई है। फिर भी देश और विश्व बाजार में मौजूद कंपनियां भारत में विस्तार और कारोबार शुरू करने की तैयारी कर रहीं हैं। इसकी प्रमुख वजह है लंबे समय तक