\"सामाजिक कर्ताओं में हाे साहस\'
कस्बेके जैन स्थानक में शनिवार को सौभाग्य मुनि ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सामाजिक कर्ताओं में अदम्य साहस होना चाहिए।
मुनिश्री ने कहा कि परिस्थितियां सर्वत्र प्रतिकूल हैं। नि:स्वार्थ भाव से दीर्घकालीन सच्चा सहयोगी मिल पाना अत्यंत कठिन है। सब कुछ अच्छा सहयोग मिल जाए तो सद्भाग्य की बात होगी। इसका कोई निश्चय नहीं हो सकता अत: सब कुछ स्वयं को करना पड़ता है।उन्हाेंने कहा कि यहीं सोचकर सेवा के कार्यक्षेत्र में उतरे आज समाज में जो परिस्थितियां बन रही है। यदि उन्हें बदला नहीं गया तो कठिनाइयां बढ़ जाएगी। मेवाड़ प्रवर्तक महाश्रमण मदन मुनि ने कहा कि अभिमान के भाव से किए गए सभी कार्य निष्फल हो जाते है। अत: आत्मकल्याण की कामना रखने वाले व्यक्तियों को अभिमान का सर्वथा त्याग करना चाहिए। धर्मसभा में उदयपुर, सिंदू, घासा, फतहनगर, सनवाड़, पलाना, वल्लभनगर आदि जगहों से सैकड़ों श्रावक पहुंचे।
मावली. श्रावकोंको संबोधित करते मुनिश्री। फोटो: भास्कर