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परमेष्ठी राज्य स्थापित कर लोकहितैषी बने बप्पा रावल

6 वर्ष पहले
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डॉ.रघुवीर सिंह सिरोही ने कहा कि इतिहास गवाह है कि विदेशी ताकतों के (मुगल क्रांति) सामने केवल मेवाड़ और सिरोही ही नतमस्तक नहीं हुए। उन्होंने हमेशा स्वतंत्रता और स्वाभिमान की रक्षा करते हुए भारतीय संस्कृति को जीवंत रखा। बप्पा रावल ने परमेष्ठी राज्य की स्थापना पर लोकहित का कार्य किया।

डॉ. रघुवीर सिंह सोमवार को पेसिफिक कला महाविद्यालय में ‘भारतीय इतिहास संस्कृति के संरक्षण विकास में बप्पा रावल का योगदान’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोल रहे थे। आयोजन में बड़ी संख्या में इतिहासकारों शोधार्थियों की मौजूदगी रही। डॉ. राजशेखर व्यास ने विषय प्रवर्तन पर विचार रखे। विशिष्ट अतिथि डाॅ. राघव राज सिंह ने कहा कि बप्पा पूरे मेवाड़ के पिता समान थे। विद्यापीठ यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो.एस.एस. सारंगदेवोत सांसद अर्जुन मीणा, कला महाविद्यालय डीन प्रो.टी.पी. आमेटा, डॉ.चन्द्र शेखर शर्मा ने विचार रखे। कुलपति प्रो.बी.पी. शर्मा ने कहा कि आगामी समय में मेवाड़ के इतिहास में महिलाओं के योगदान पर विचार गोष्ठी होगी। आयोजन में पाहेर सचिव राहुल अग्रवाल कुलसचिव शरद कोठारी मौजूद थे। कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में 70 शोध पत्र पढ़े गए। तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता प्रो.के.एस गुप्ता, प्रो.मीना गौड़, प्रो. नीलम कौशिक, डॉ.चन्द्र शेखर शर्मा ने की। समापन सत्र में लक्ष्यराज सिंह मेवाड, निवृत्ति कुमारी महापौर चंद्रसिंह कोठारी बतौर अतिथि मौजूद रहे।

पेसिफिक कला महाविद्यालय में संगोष्ठी में मंचासीन अतिथि। भास्कर

‘भारतीय इतिहास संस्कृति के संरक्षण विकास में बप्पा रावल का योगदान’ विषयक संगोष्ठी में मौजूद प्रतिभागी। भास्कर