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‘समता जिसका प्राण हो, वह श्रमण’

6 वर्ष पहले
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उदयपुर|मुनि प्रणम्यसागर ने कहा कि समता जिसका प्राण हो, वह श्रमण है। वही उत्कृष्ट अंतरात्मा शुद्धोपयोग है और वही मुक्त है। ज्ञानावरण, दर्शनावरण, मोहनीय और अन्तराय इन चार कर्म समूह रूपी इंधन को जलाने के लिए ध्यान एक अग्नि है। मुनिश्री सोमवार को सेक्टर 5 स्थित शान्तिनाथ जिनालय में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे।

चिन्मयनंदमहाराज ने किया केशलोचन: आचार्यकनकनंदी के शिष्य मुनि चिन्मयनंद ने मंगलवार को साधु भवन में केशलोचन किया। माणकचंद जैन ने बताया कि समारोहपूर्वक हुए आयोजन में मांगीलाल लोलावत, शांतिलाल वेलावत, जीतमल सिंघवी, पुष्कर भदावत ने विचार रखे।