उदयपुर. होटल व्यवसायी की हत्या के साढ़े 14 साल पुराने मामले में निर्दोष युवक को थाने लाकर अपराध कबूल करने के लिए यातनाएं देने के आरोपी पांच पुलिस अधिकारियों को डिस्चार्ज करना सीजेएम कोर्ट की त्रुटि माना है। सेशन कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ निगरानी स्वीकार करते हुए मुकदमा वापस चलाने के निर्देश दिए। साथ ही बेकसूर को यातनाएं देने के आरोपी आईपीएस और उदयपुर के तत्कालीन एसपी मोहनलाल लाठर, एएसपी संजीव नार्जरी सहित पांच पुलिस अधिकारियों को 15 जनवरी को अदालत में हाजिर होने के आदेश दिए हैं।
निर्दोष को प्रताड़ित करने के आरोपी अफसरों को डिस्चार्ज करना गलत : कोर्ट
एडीजे-प्रथम हरिओम शर्मा अत्री ने सीजेएम के फैसले के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए लिखा कि निचली अदालत ने सीआरपीसी की धारा 197 की गलत विवेचना की। किसी व्यक्ति के खिलाफ साक्ष्य नहीं होने के बावजूद हत्या जैसे संगीन जुर्म का अारोपी बनाकर प्राणघातक यातनाएं देने के आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सीआरपीसी की धारा 197 के तहत अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।
न्यायाधीश शर्मा ने तत्कालीन एसपी मोहन लाल लाठर, एएसपी संजीव नार्जरी, इंस्पेक्टर रिछपाल सिंह जाखड़, सब इंस्पेक्टर जितेंद्र आंचलिया एएसआई भंवर सिंह को पूर्व मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में उपस्थित होने के आदेश दिए। पेश नहीं होने पर गिरफ्तारी वारंट से तलब करने को कहा है।