तीड़ा ने बेपर्दा की छल की राजनीति
उदयपुर | वेस्टजोन कल्चरल सेंटर जोधपुर की राजस्थान संगीत नाटक के साझे में तीन दिवसीय ‘राजस्थानी नाट्य समारोह’ में शुक्रवार को विजयदान देथा की कहानी पर आधारित नाटक ‘तीड़ो राव’ का मंचन हुआ। नाटक के कुछ अंशों ने दर्शकों को हंसाया तो कुछ ने छल कपट की राजनीति को बेपर्दा किया। नाटक की शुरुआत हास्य और मनोरंजन के साथ ख्याली पुलाव पकाने वाले तीड़ा का किस्मत कैसे साथ देती है और वो सत्ता के शिखर तक जा पहुंचता है। नाटक के माध्यम से समाज में व्याप्त आडंबर, छल कपट धर्मांधता पर व्यंग्य किया गया। महत्वाकांक्षी तीड़ा, जो बार बार संयोग से मौत से बच कर जाता है। इससे उसकी लोकप्रियता बढ़ती है उसे संत बना दिया जाता है। इसी दौरान कुछ चमत्कार ऐसे होते हैं कि लोग तीड़ा को पूजने लगते हैं तथा उसकी ख्याति राजा तक पहुंच जाती है। यहीं से वो सत्ता के शिखर तक पहुंच जाता है। जोधपुर की अपूर्वा संस्था के कलाकारों ने रमेश भाटी नामदेव निर्देशित नाटक ‘तीडो राव’ को किस्सागोई बात पोशी शैली में रचित नाटक एक मनोरंजक प्रस्तुति बन सकी। समारोह में शनिवार को नाटक ‘भोलो भैरू’ का मंचन होगा।
शिल्पग्राम के दर्पण सभागार में नाटक मंचन करते कलाकार। नाटक देखने के लिए कई शहरवासी पहुंचे।