- Hindi News
- \"हिंदी बोलने में झिझक नहीं होनी चाहिए\'
\"हिंदी बोलने में झिझक नहीं होनी चाहिए\'
उदयपुर|सुखाडिय़ा विविके हिन्दी विभाग की ओर से शुक्रवार को \\\"दक्षिण भारतीय विवि में हिन्दी और राजनीति\\\' विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ। गोष्ठी में प्रो.प्रदीप त्रिखा ने बताया कि भाषायी विवाद अब राजनीतिक रूप लेता जा रहा है। वैश्विक पटल पर हमें अंग्रेजी को भी व्यवहार में लाना होगा, लेकिन भारत के मुद्दे पर आकर हमें हिंदी बोलने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए। उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो. फारुख बख्शी ने कहा कि भाषाओं को लेकर हमें खुले विचार रखने होंगे, इन मुद्दों को राजनीतिक रंग देने की अपेक्षा प्रेमपूर्ण तरीके से हल करने चाहिए। महाविद्यालय सह-अधिष्ठाता प्रो. मदनसिंह राठौड़ ने कहा कि भाषायी विविधता समाप्त नहीं की जानी चाहिए, फिर भी राष्ट्र स्तर पर किसी एक भाषा अनिवार्य होनी चाहिए। डॉ. नवीन नंदवाना ने कहा कि हिन्दी भाषा की उपेक्षा भारतीय संस्कृति की ही उपेक्षा है।