- Hindi News
- उच्च शिक्षा हासिल करो, जड़ों से जुड़े रहो
उच्च शिक्षा हासिल करो, जड़ों से जुड़े रहो
शियादाउदी बोहरा समाज के 53वें सैयदना आलीकदर मुफद्दल सैफुद्दीन ने कहा कि नौजवान उच्च शिक्षा हासिल कर बेहतर मुकाम पाएं, लेकिन मौला इमाम हुसैन के गम को, अपनी संस्कृति को कभी भूले। सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन साहब बार-बार कहते थे कि समय के साथ जो मूमिनीन अलग-अलग हो गए, वे फिर से एक हो जाएं। मैं एक बार फिर स्नेह, प्रेम और मोहब्बत के साथ अपील करता हूं कि दूर चले गए भाई फिर से लौट आएं।
सैयदना आलीकदर मुफद्दल सैफुद्दीन सोमवार सुबह खारोल कॉलोनी स्थित बुरहानी मस्जिद में आयोजित सालगिरह की वायज में हजारों अकीदतमंदों को वायज फरमा रहे थे। तख्ते ईमामी पर जलवा अफरोज होकर उन्होंने कहा कि मौला (52वें सैयदना) बहुत याद आते हैं। उनकी याद में बहने वाले आंसुओं की कीमत नहीं आंकी जा सकती। इन आंसुओं में मौला की अकीदत छीपी है। दानिशमंदों सिर के बालों जितने गुनाह भी खुदा माफ कर देता है, अगर उससे बंदगी रखो तो। उदयपुर में रहमत की अजब फिज़ां है, खुदा यहां रहमत कर गुनाह माफ करे।
खरोल कॉलोनी में वायज पढ़ते सैयदना साहब को लाइव सुनते हुए। फोटो: भास्कर
{ अकीदतमंद कभी किसी के प्रति द्वेष, ईर्ष्या भाव रखें। जाति-समाज के नाम से किसी से झगड़ा करें।
{ विवाद की स्थिति में कोर्ट जाने के बजाय आपस में निपटारा करें। अपने आप में अहम की भावना नहीं रखें।
{ वालिदेन बच्चों को पीटें नहीं, मोहब्बत करें। बच्चों पर दबाव डालने के बजाय वही पढ़ाएं, जिनमें रुचि हो।
दुनियाभर में वायज का प्रसारण
बुरहानीमस्जिद में हुई वायज का देश-दुनिया की तमाम बोहरा समुदाय की मस्जिदों में प्रसारण किया गया। देश-दुनिया में सभी जगहों पर अकीदतमंदों ने एक दूसरे को मिलाद की मुबारकबाद दी। प्रवक्ता डाॅ. बी. मूमिन ने बताया कि सैयदना साहब ने कर्बला के शहीदों को याद कर मातम मनाया। अकीदतमंदों ने भी मातम मनाया। बुरहानी मस्जिद में सैयदना साहब के पहुंचते ही मौला-मौला, खम्मा मौला... गूंजने लगा। वायज के समापन पर मौला इमाम हुसैन की शहादत का जिक्र बयां किया गया। इसके बाद शाही भोज हुआ। वायज के बाद जौहर असर की नमाज अदा की गई।