उदयपुर. निगम परिसर की नर्सरी में चार माह से फिसल पट्टी बच्चों के खिलौने अनुपयोगी पड़े होने की भास्कर में खबर देख मंगलवार को निगम में हलचल शुरू हो गई। मेयर ने संबंधित अधिकारियों को बुलाकर जरूरत के अनुसार पार्कों में ये साधन लगाने के लिए पाबंद किया। उन्होंने कहा कि नए खिलौने सप्लाई हाेते ही जरूरत के मुताबिक पार्क में लगवाए जाएं।
गोद देने के दोहरे फायदे
निगम का तर्क है कि पार्क ठेके पर हर महीने बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है। कई बार रेट ज्यादा आने के बावजूद मजबूरी में ठेकेदार को वर्क ऑर्डर देना पड़ता है। कई बार ठेकेदार टेंंडर में शामिल ही नहीं होते। इस कारण बजट में प्रावधान के बावजूद पैसा पड़ा रह जाता। ऐसे में निगम अपने स्तर पर या गोद देकर पार्क का विकास करवाएगा तो पैसा भी बचेगा और जनसहयोग से ज्यादा पार्कों की तस्वीर बदल सकेगी।