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प्रतिस्पर्धा और प्रतिष्ठा में हिंदी बाधक नहीं : वैरागी

7 वर्ष पहले
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प्रतिस्पर्धा और प्रतिष्ठा में हिंदी बाधक नहीं : वैरागी

उदयपुर| हिंदीभाषा का इतिहास कई हजारों वर्ष पुराना हैए इस भाषा की उपेक्षा महज इस आधार पर करना अनुचित हैं कि प्रतिस्पर्धा और प्रतिष्ठा की स्थापना में यह बाधक हैं। हिंदी भाषा कदापि प्रतिस्पर्धा और प्रतिष्ठा में बाधक नहीं हैं वरन यह अपने समृद्ध साहित्य और परम्पराओं के द्वारा हमारे सर्वांगीण विकास में सहायक हैं। ये विचार विद्या भवन रूरल इंस्टिट्यूट के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित हिंदी सप्ताह के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए डॉ एलएल वैरागी ने व्यक्त किये। विशिष्ट अतिथि डॉ. अर्चना जैन मनोज राजगुरु ने भी संबोधित किया। आरके पुरम स्थित स्कॉलर्स एरिना गर्ल्स बीएड कॉलेज में हिंदी दिवस समारोह सोमवार को मनाया गया। कार्यक्रम के तहत निबंध आशुभाषण प्रतियोगिता हुई। निबंध का विषय मेरे सपनों का भारत-नई चुनौतियों समाधान था। प्रतियोगिताओं में सभी छात्राध्यापिकाओं ने विचार रखे। निर्णायक प्राचार्य डॉ. लोकेश जैन अकादमिक निदेशक नारायण लाल शर्मा थे। संचालन अंजलि दशोरा ने किया। आरएनटी मेडिकल कॉलेज में पहली बार हिंदी दिवस मनाया गया। \\\'हिन्दी का राष्ट्र के विकास में योगदान\\\' विषय पर डिबेट हुई। कार्यक्रम में श्रुति लेखन कवि गोष्ठी आदि का भी आयोजन हुआ। यहां प्राचार्य डॉ. चन्द्रा माथुर, कलाविद् डॉ. रियाज तहसीन केन्द्रीय अकादमी विवि के निदेशक डॉ. संगम मिश्रा उपस्थित थे।