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ड्राइवर-कंडक्टर के नंबर मांगने पर एजेंट्स ने दिए ऐसे जवाब 10रुपए कमीशन मिलता है, हमें नंबर से क्या करना
उदयपुर. शहर से रोज ढाई सौ अधिक ट्रैवल्स बसें सैकड़ों किमी की दूरी तय करती हैं। इनमें 10 हजार महिलाओं सहित करीब 23 हजार लोग आते-जाते हैं। सुरक्षा के लिहाज से रोडवेज बसों की तरह तो हेल्पलाइन नंबर हैं ही ड्राइवर-कंडक्टर की पहचान का रिकॉर्ड। परिवहन विभाग के पास भी रिकॉर्ड नहीं रहता। ऐसे में महिला के साथ अभद्रता की स्थिति में समय पर मदद मिल पाती ही अपराधी पकड़ में आता है।
दिल्ली में कैब टैक्सी में दुष्कर्म के बाद भास्कर ने शहर की 28 एजेंसियों और 64 प्राइवेट बसों में कंडक्टर चालकों की पड़ताल की तो पता चला कि किस बस को कौन चला रहा है और कंडक्टर कौन है इसकी जानकारी आरटीओ को नहीं रहती। उनके पास लाइसेंस लेने वालों का रिकॉर्ड ही है। चौंकाने वाली बात यह है कि शहर में 100 से ज्यादा एजेंट सक्रिय हैं। इनका काम पेसेंजर को बस में बिठाने के बाद खत्म हो जाता है।