उदयपुर. आरएनटीमेडिकलकॉलेज को दो साल बाद डॉ. डीपी सिंह के रूप में स्थायी प्राचार्य मिल गए। शुक्रवार को नियुक्ति होने पर डॉ. सिंह ने ज्वाइन भी कर लिया। डॉ. एसके कौशिक के सेवानिवृति के बाद से यह पद करीब दो साल से रिक्त था। प्राचार्य पद के लिए पिछले सरकार के कार्यकाल में तीन बार आवेदन लिए गए थे, लेकिन साक्षात्कार नहीं हुए थे। चौथी बार पिछले महीने आवेदन लेने के बाद एक सप्ताह पहले जयपुर में साक्षात्कार हुए थे। इस पर शुक्रवार को मुहर लग गई।
साढ़े 3 साल से रहे हैं कार्यवाहक अधीक्षक
डॉ.एफएस मेहता अगस्त 2011 में सेवानिवृत्त हुए। डॉ. ए.के खरे ने पद संभालने के कुछ समय बाद ही असमर्थता जता दी। इसके बाद से डॉ. डीपी सिंह कार्यवाहक अधीक्षक का कार्यभार संभाल रहे थे। दो महीने पहले कार्यवाहक प्राचार्य के सेवानिवृत्त होने के बाद दोहरी जिम्मेदारी संभाल हुए थे। इस बीच एमसीआई का निरीक्षण कराया गया।
स्थायी प्राचार्य के सामने हैं ये चुनौतियां
साढ़े तीन साल कार्यवाहक अधीक्षक रहने के बाद अब डॉ. सिंह को स्थाई प्राचार्य के रूप में तीन साल ही मिल पाएंगे। इसके बाद सेवानिवृत्ति होगी। आवेदन आमंत्रित होने और साक्षात्कार होने तक अधीक्षक का चार्ज सोमवार को डॉ. तरुण गुप्ता को सौंपा जा सकता है।
> मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 150 सीटों से बढ़ाकर 250 कराना है। इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार हो रहा है, लेकिन फैकल्टी जुटाना चुनौती है।
> हॉस्पिटल परिसर में सीमित पार्किंग के बाद भी सड़क पर पार्किंग होती है। खुला परिसर उपलब्ध कराना है।
> आए दिन होने वाले झगड़ों पर रोक लगानी होगी।
> मेडिसिन विभाग के वार्ड बिखरे हुए हैं। सर्वाधिक मरीज भी इसी विभाग में भर्ती होते हैं।
> अस्पतालों में सफाई व्यवस्था रखवाना बड़ी चुनौती है। इसको लेकर चिकित्सा मंत्री भी दौरा कर हिदायत दे चुके हैं।