उदयपुर. शहर की सड़कों पर गड्ढे बन गए हैं। गिट्टी निकल रही है। केबल डालने वालों ने खुदाई कर हालात और बिगाड़ दिए हैं। कहीं-कहीं गड्ढों में मिट्टी डाली गई, जिससे धूल उड़ती रहती है। भीतरी शहर में बने सीसी रोड भी उखड़ गए हैं और गिट्टी निकल आई है। वाहन हिचकोले खाते हुए चल रहे हैं या दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। अधिकांश सड़कों की ऐसी हालत 25 दिनों में ही हो गई।
16 अगस्त से राज्य सरकार के संभाग दौरे सरकार आपके द्वार अभियान से पहले मानसून सीजन की अनदेखी कर आनन-फानन में सड़कों पर डामर, पेचवर्क कर दिया गया, जो बारिश की वजह से टिक नहीं पाया। नगर निगम निर्माण कार्यों की पर्याप्त मॉनिटरिंग नहीं कर पाया। पाइप लाइन या केबल डालने के लिए शुल्क वसूली के बावजूद सड़कों की हालत बदतर बनी हुई है। तय अवधि में ही सड़कें खराब हो जाने के बावजूद ठेकेदार रिपेयरिंग नहीं करवा रहे।
खोदी गई सड़कों में ठेकेदार निकाले गए मलबे को ही डाल देते हैं। सड़क सुधारना तो दूर की बात है। संबंधित विभाग इसकी मॉनिटरिंग भी नहीं करते हैं।
ठेकेदार को जब टेंडर दिया जाता है, तो रखरखाव की अवधि निर्धारित की जाती है, लेकिन सड़क उखड़ने पर भी सुधार नहीं किया जाता।
नई सड़क या पेचवर्क का मिश्रण नहीं जांचा जाता है। ठेकेदार अपने स्तर पर इसकी औपचारिकता पूरी कर देता है। निर्माण में गुणवत्ता नहीं पाती है।
मानसून सीजन में सड़कें बनना ही गलत
मानसून के मौसम में सड़कों की मरम्मत या निर्माण गलत है। मिश्रण की पकड़ नहीं बन पाती है। दूसरी बात सड़क पर गड्ढा करने के बाद मिट्टी डालना सरासर गलत है। सड़क के गड्ढे में पहले मिट्टी, सीमेंट, रेेत का मिश्रण डालना चाहिए। जिसे कूट से अच्छी तरह कूटना चाहिए, ताकि उसके कहीं गेप नहीं रहे। रोड रोल चलाएं तो काफी बेहतर। इसके बाद ही उस हिस्से पर कंक्रीट या डामर होना चाहिए, जबकि ऐसा नहीं होता है। काम होने के बाद गड्ढे में वहीं मलबा डाल दिया जाता है। जब इस जगह से वाहन गुजरते हैं तो मलबा दबता है और मिट्टी डालने से बने गेप में गड्ढा बन जाता है। जो धीरे-धीरे बड़ा होता रहता है। -डॉ.वीरेंद्र सिंह, सिविल इंजीनियर, उदयपुर
> बंशी पान चौराहे से शास्त्री सर्कल रोड पर 12 अगस्त को पेचवर्क हुआ। यहां डामर धुल गया कंक्रीट बाहर निकल आई है।