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मीसा बंदियों ने वृद्धावस्था पेंशन छोड़ी, लेकिन अब तक नहीं मिला हक
उदयपुर | आपातकालमें मीसा, डीआईआर के तहत जेल में बंदी रहे लोगों को पेंशन देने के लिए बजट में फिर से घोषणा हुई थी, लेकिन अभी तक पेंशन शुरू नहीं हो पाई। ऐसे लोगों ने इस पेंशन के चक्कर में वृद्धावस्था पेंशन का लाभ भी नहीं लिया, लेकिन इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा।
आपातकाल के बंदियों को पेंशन देने की घोषणा मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने वर्ष 2008 में की थी। योजना लागू होने से पहले सरकार बदल गई। पांच साल गहलोत सरकार का कार्यकाल निकलने के बाद फिर से वसुंधरा सरकार आई और पहले बजट में फिर से पेंशन की घोषणा की, जो अभी तक लागू नहीं हो पाई। इस योजना में आवेदन कर चुके लोगों ने लाभ से वंचित रहने की आशंका के चलते वृद्धावस्था पेंशन का लाभ भी नहीं लिया। पहली घोषणा के बाद 6 साल के दरमियान 64 में से 12 लोगों का निधन हो चुका है, जो पेंशन पाने के हकदार थे। नियमानुसार पति का निधन होने पर प|ी को पेंशन मिलनी है, लेकिन कई परिवार ऐसे भी हैं, जिनमें पति-प|ी दोनों का निधन हो चुका है।
अप्रैल में करवाए गए थे आवेदन
वार्षिकबजट में घोषणा के बाद लाभार्थियों में आवेदन की होड़ मची। लोगों ने जेल से रिकॉर्ड लेने में चक्कर काटे। जैसे-तैसे अप्रैल तक लोगों ने आवेदन किए। आवेदकों को 1 जनवरी 2014 से पेंशन मिलना तय है, लेकिन आगे प्रगति नहीं हो पाई है। मंच समन्वयक दोशी ने बताया कि आपातकाल में 1975-77 के दौरान मीसा, डीआईआर में 2222 लोग प्रदेश की जेलों में बंद रहे थे। उदयपुर में मीसा के 7 डीआईआर के 98 लोग बंदी रहे। वर्ष 2008 में प्रदेश में 850 उदयपुर में 64 आवेदन जमा हुए थे।
पेंशन दोगुनी, लेकिन देंगे कब और किसे
लोकतंत्र रक्षा मंच के स्थानीय समन्वयक दलपत दोशी का कहना है कि पेंशन चिकित्सा सहायता दुगुनी करने की घोषणा तो हो गई, लेकिन पेंशन शुरू होने से पहले ही अगर लोगों का निधन हो जाता है तो सरकार पेंशन दुगुनी करके भी देगी किसे। तत्कालीन वसुंधरा सरकार ने 2008 को मीसा बंदियों को पेंशन के आदेश दिए थे। उस समय मासिक 6 हजार रुपए पेंशन 600 रुपए चिकित्सा सहायता की घोषणा थी। अब 12 हजार रुपए 1200 रुपए चिकित्सा सहायता देनी है।
प्रक्रिया पूरी होने को है
^कलेक्टरकी अध्यक्षता में हमारी कमेटी बनी, जिसमें जेल अधीक्षक भी शामिल है। आवेदन पत्रों की जांच करवाई गई। प्रक्रिया पूरी होने के करीब है। कुछ दिनों में बै