मौसमी बीमारों की संख्या बढ़ी
मौसमी बीमारी के मरीज हुए दोगुने, कहीं डॉक्टर नहीं हैं, कहीं हॉस्पिटल ही \\\"बीमार\\\'
सलूंबर : अस्पतालमें पहले से ही डॉक्टरों की कमी, चार छुट्टी पर चले गए
जिलेभर के अधिकतर हॉस्पिटलों के आउटडोर में मरीजों की संख्या आम दिनों के मुकाबले दोगुनी हो गई है। मरीजों का इलाज भी किया जा रहा है, लेकिन अपर्याप्त रूप से। दरअसल, करीब सभी हॉस्पिटलों में स्वीकृत पदों में से अधिकतर पद खाली हैं। कहीं कंपाउंडर के भरोसे इलाज किया जा रहा है तो कहीं दूसरे हॉस्पिटलों से कुछ दिनों के डेपुटेशन पर लगाकर इलाज की व्यवस्था की जा रही है। एक-एक हाॅस्पिटल में एक-एक डॉक्टर हर रोज करीब तीन सौ मरीजों का इलाज कर रहे हैं। कई हॉस्पिटलों में मशीनें खराब पड़ी हैं। गरीब लोगों के पास विकल्प नहीं होने पर हॉस्पिटलों में लाइन लग रही हैं। कई हाॅस्पिटलों का भास्कर ने जायजा लिया।
अस्पताल बड़ा, लेकिन सुविधाएं छोटी
झाड़ोल सीएचसी : हर तीसरे दिन आते हैं नए डॉक्टर
झाड़ोल (फ.) | ढाईलाख की आबादी वाले तहसील मुख्यालय का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दो साल से उधार के डॉक्टरों के भरोसे चल रहा है। इस प्रथम श्रेणी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर सरकार स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिकित्सकों के 12 पद स्वीकृत हैं, लेकिन एक भी स्थायी डॉक्टर नियुक्त नहीं है। यहां सप्ताह में दो दिन पानरवा, दो दिन मादड़ी तीन दिन मोहम्मद फलासिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक की अस्थायी ड्यूटी लगाकर यहां आने वाले मरीजों को इलाज मुहैया कराया जाता है।
सभीव्यवस्थाएं ठप पड़ी हैं : स्थायीचिकित्सक नहीं होने से अस्पताल के आॅपरेशन थियेटर कक्ष पर पांच साल से ताले लगे हैं। बिजली गुल होने की दश में व्यवस्था के नाम पर डीजी सेट है लेकिन लंबे समय से खराब पड़ा है। कई बार मरम्मत करने वाली कंपनी को कहा गया, लेकिन ठीक नहीं हुआ। अस्पताल कर्मियों का कहना है कि चार साल में चार दिन भी यह डीजी सेट ठीक से काम नहीं आया है। कई बार टाॅर्च की रोशनी में प्रसव करवाना पड़ा है।
डॉक्टर नहीं देख पाते एक मरीज को
अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक भले ही 24 घंटे सेवाएं दें एक मरीज को देखने के लिए मुश्किल से एक मिनट भी नहीं निकाल पाते। यहां औसत 300 मरीज हर रोज आते हैं। इसके अलावा प्रसव कराना, गंभीर मामलों में रेफर करना, हादसे में गंभीर घायलों का इलाज करना, एमएलसी मेडिकल सर्