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विकास के ये वादे प्रस्ताव में सिमटे

7 वर्ष पहले
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पिछले बाेर्ड कार्यकाल के अंतिम दिनों तक बनती रही समिति, 11 बड़े प्रस्ताव पास, पर काम नहीं

नगरनिगममें 55 में से 49 पार्षदों वाले भाजपा बोर्ड के सामने 14 समितियां चुनना और उनके दम पर शहर का विकास बड़ी चुनौती है। 36 पार्षदों वाले अपने पिछले बोर्ड के कड़वे अनुभवों को देखते हुए संगठन और मेयर दोनों ही इसे लेकर फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। पार्षद भी समितियों में शामिल होने को लेकर जोड़-तोड़ में जुटे हैं। पिछले बोर्ड में समितियों के कामकाज पर शहर भाजपा की गुटबाजी का सीधा असर नजर आया। विकास के 11 बड़े वादे सिर्फ प्रस्ताव तक ही सिमट कर रह गए। कुछ समिति अध्यक्ष तो विपक्ष की भूमिका में रहे। संगठन को दखल देकर कई समितियों में फेरबदल तक करना पड़ा। स्थिति यह भी बनी कि डिप्टी मेयर से भी समिति छीन ली गई।

गुटबाजी के कारण ही राजस्व गैराज समिति में भी बदलाव हुआ। विरासत संरक्षण जैसी समिति तो बोर्ड कार्यकाल के अंतिम दिनों में बनी। निर्माण, गैराज स्वास्थ्य समिति में टकराव हुआ तो वित्त राजस्व समिति की अध्यक्षों में तीखी बहस की नौबत गई। पेवर से जुड़े कामों को करवाने की कमान मेयर ने निर्माण समित से छीन ली। मेयर की अध्यक्षता वाली समझौता समिति का अघोषित बहिष्कार तक हो गया।

> आयड़ विकास में कुछ नहीं हुआ।

> 16 सिटी बसों का प्रस्ताव पास पर एक ही रूट पर 6 सिटी बसें चल पाई।

> उपनगरीय क्षेत्र में मिनी स्टेडियम गार्डन का विकास नहीं हुआ।

> आबादी विस्तार को देखते हुए सब फायर स्टेशन नहीं बना पाए।

> तत्काल पेचवर्क के लिए आधुनिक मशीन नहीं खरीदी जा सकीं।

> प्रमुख मार्गों को केेबल लैस बनाने अंडर ग्राउंड केबल का काम नहीं हाे पाया।

> पर्यटकों की सुविधा के लिए फूड स्ट्रीट नहीं बनी।

> निगम परिसर वाई फाई नहीं हुआ।

> गुलाबबाग में अप्पू घर निर्माण अत्याधुनिक ट्रेन का संचालन नहीं हुआ।

> फतहसागर किनारे गुलाबबाग में गोल्फ कार नहीं चला पाए।

> फतहसागर किनारे साइकिल किराए पर देने की योजना नहीं चल पाई।

गंदी बस्ती सुधार

विकासके प्रस्ताव लिए, मगर क्रियान्वयन नहीं

प्रशासनिक

समितिमेयर के पास थी। नियमित बैठकें भी नहीं हुई।

भवनअनुमति

नियमितबैठकें हुई। पत्रावलियों का निस्तारण।

निर्माण

शहीदस्मारक, जहाजनुमा टापू, हॉल पार्किंग।

स्वास्थ्य

झीलसफाई, 307 महिला सफाई कर्मचारियों