संगोष्ठी का पहला सत्र।
उदयपुर. जम्मू-कश्मीरअध्ययन केंद्र (नई दिल्ली) के निदेशक अरुण कुमार ने कहा कि अनुच्छेद 370 के कारण
जम्मू-
कश्मीर के लाखों लोग आज भी उन अधिकारों से वंचित हैं, जो देशभर में लागू हैं। इनमें मानवाधिकार, सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, महिला संबंधित अधिकार आदि हैं। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव में यह साबित हुआ है कि वहां के लोगों ने आज अलगाववाद को नकार कर भारतीय लोकतंत्र में विश्वास जताया है।
अरुण कुमार सोमवार को सुविवि गेस्ट हाउस सभागार में ‘जम्मू कश्मीर : विधिक तथा संवैधानिक स्थिति’ विषयक संगोष्ठी को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। आयोजन सुविवि के लॉ कॉलेज की ओर से किया गया था। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय पाकिस्तान से शरणार्थी के रूप में जम्मू-कश्मीर आए लाखों लोगों को आज भी नागरिकता नहीं मिल पाई है, जबकि उनकी चार-चार पीढिय़ां बीत चुकी हैं।
आजादी के 67 साल बाद भी वे लोग आज भी तंबुओं में रहने को मजबूर हैं। ये हालात मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है। हमें उन शरणार्थियों के मानवाधिकारों के बारे में भी विचार करना चाहिए।
संगोष्ठी का पहला सत्र ‘जम्मू कश्मीर : भौगोलिक एवं सांस्कृतिक एकात्मता’ विषय पर सुबह 10 बजे शुरू हुआ, जिसके मुख्य वक्ता पत्रकार जम्मू-कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ आशुतोष भटनागर थे। पहले सत्र की अध्यक्षता लॉ कॉलेज के पूर्व डीन डाॅ. आर.एल. भट्ट ने की। दूसरे सत्र की अध्यक्षता लॉ कॉलेज डीन प्रो. आनंद पालीवाल ने की।
जम्मू-कश्मीर पर कराएंगे शोध कार्य
अंतिम सत्र ‘जम्मू-कश्मीर : विधिक तथा संवैधानिक स्थिति’ विषय पर दोपहर 3 से 4.30 बजे तक चला, जिसकी अध्यक्षता सुविवि कुलपति प्रो. आई.वी. त्रिवेदी ने की। प्रो. त्रिवेदी ने कहा कि विश्वविद्यालयों का मुख्य कार्य अध्ययन-अध्ययापन, शोध तथा विस्तार-व्याख्यान करना है। सुखाड़िया यूनिवर्सिटी संघटक विधि महाविद्यालय में जम्मू-कश्मीर की विधिक संवैधानिक स्थिति पर शोध कार्य विस्तार व्याख्यान का आयोजन करेगा।