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पौराणिक प्रसंग

7 वर्ष पहले
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अमृत चर चौघड़िए में : शाम 6.26 से रात 9.26 बजे और रात 11 बजे तक वृष लग्न

शुभ के चौघड़िए में : सुबह 6.29 से 7.59 बजे

वृषभ स्थिर लग्न में : सुबह 10.19 से 12.36 बजे

अभिजीत मुहूर्त में : दोपहर 12 से 3 बजे तक

शुभ के चौघड़िए में : शाम 5.46 से 6.26 बजे।

शारदीय नवरात्र गुरुवार को शुरू होगा। शक्ति पीठों के साथ घरों में माता की आराधना के पूजन और व्रत-अनुष्ठान शुरू होंगे। देवी स्वरूपों की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी और इसी के साथ गरबा-डांडिया की धूम भी शुरू हो जाएगी। मंदिरों की सजावट की जा रही है तो कहीं माता के भव्य दरबार बनाए जा रहे हैं।



हर ओर नवरात्रि की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। बता दें कि तिथि क्षय के कारण इस बार नवरात्र आठ दिन की मानी गई है। नवमी और दशहरा 3 अक्टूबर को है।

आद्या शक्ति की आराधना कल से

उदयपुर | नवरात्रिके लिए कलाकार देवी प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं। अशोकनगर स्थित बंग भवन में प्रतिमाओं को प्रसंग के अनुसार जीवंत बनाने के लिए मिट्टी से उन राक्षसों के मुंड बनाए गए, जिनका मर्दन माता ने अपने विभिन्न अवतारों में किया था। किसी स्वरूप में ये मुंड मां के हाथ में दिखेंगे तो किसी में इनकी माला बनेगी। फोटाे : ऋषभजैन

इन मुंडों से बनेगी दुर्गति नाशिनी की माला

जब मांदुर्गा महिषासुर से युद्ध कर रही थीं, तो वह इतनी क्रोधित हो गईं कि उनके मस्तक की ज्वाला से मां काली अवतरित हुईं। गहरे काले रंग और विशाल काया वाली महाकाली ने सारे राक्षसों को मार डाला। मां दुर्गा जिन-जिन असुरों का संहार करती गईं, महाकाली ने उनके सिर काटकर अपने गले में लटका लिए। सभी राक्षस मारे गए, फिर भी उनका क्रोध शांत नहीं हुआ। संसार का विनाश होता देख भगवान शिव काली के आगे लेट गए। प्रचंड नृत्य कर रहीं काली का पांव भगवान शिव पर पड़ा तो वे अचानक शांत हो गईं। उन्हें अपने पति पर पांव रखने का पश्चाताप था।