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अपना नाम भी नहीं लिख पाए 5वीं क्लास के बच्चे

7 वर्ष पहले
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जानिए, ऐसी है हमारे जिले में सरकारी शिक्षा व्यवस्था

सरकारीस्कूलोंमें शिक्षा के स्तर को नापने के लिए मंगलवार को शुरू किए गए शिक्षा संबलन कार्यक्रम में सामने आया कि पांचवीं कक्षा के स्टूडेंट अपना नाम तक नहीं लिख पाए। ये स्थिति सरकारी स्कूलों को लेकर हालही में पंचायतीराज मंत्री गुलाबचंद कटारिया की ओर से दिए गए उस बयान को प्रमाणित करती है जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकारी टीचर अच्छी सैलरी मिलने के बावजूद रिजल्ट अच्छा नहीं दे पा रहे हैं। यह हाल उन्हीं के गृह जिले का है।

शिक्षा सम्बलन कार्यक्रम के तहत मंगलवार को कलेक्टर आशुतोष पेंढणेकर सहित शिक्षा अधिकारी स्कूलों में निरीक्षण को पहुंचे। कलेक्टर ने बेदला के उच्च माध्यमिक विद्यालय सुखदेवी नगर और उमावि पीपली चौक का निरीक्षण किया। यहां 5वीं के छात्र 501 नहीं लिख पाए। अधिकांश बच्चे 9 और 13 का पहाड़ा और अंग्रेजी में अपना नाम तक नहीं लिख पाए। कलेक्टर ने प्रिंसिपल को शिक्षा का स्टैंडर्ड सुधारने के निर्देश दिए। एडीओ कुंजबिहारी भारद्वाज ने बालिका उप्रा विद्यालय नाई में बच्चों की कॉपी जांची। सर्व शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक भरत जोशी ने कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय इंटाली खेड़ा का निरीक्षण किया।

सिर्फ अभियान पर ही जागता है प्रशासन

ये हाल इसलिए भी...

जिला प्रशासन भी शिक्षा सम्बलन कार्यक्रम में ही जागता है। बाकी दिनों में सरकारी स्कूलों का नियमित निरीक्षण नहीं होता। इस अभियान में भी यह तय होता है कौन-कब-किस स्कूल का निरीक्षण करेगा।

बेदला स्कूल में बच्चे से सवाल पूछते कलेक्टर। दो दिवसीय अभियान में 149 अधिकारियों ने पहले दिन 298 स्कूल का निरीक्षण कर शिक्षण व्यवस्था देखी।

> 12वीं कला में खमनोर के राजकीय विद्यालय की मंजु कुमारी सुथार राज्य में 6 रैंक प्राप्त की।

12वींकला में टॉप 10 में से 6 बेटियां सरकारी स्कूल की।

>माध्यमिक विद्यालय दांतीसर गिर्वा 150 विद्यार्थियों पर 2 शिक्षक दसवीं का रिजल्ट 100 फीसदी।

15 जनवरी कोशिक्षा विभाग के प्रमुख शासन सचिव खेमराज चौधरी ने स्कूलों का दौरा किया था।

} नियमित रूप से निरीक्षण होता है, मोनिटरिंग।

} विभाग सिर्फ नोटिस देता है। पांच साल में एक भी कार्रवाई नहीं।

प्रशासन और विभाग भी गैरजिम्मेदार

> शिक्षक भी टेस्ट में हुए फेल।

> 11वीं के विद्यार्थी नहीं लिख पाए अंग्रेजी व