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ठेके में मारा जाता है सफाईकर्मियों का हक

7 वर्ष पहले
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फोटो- कलेक्ट्रेट में बैठक लेतीं सफाई कर्मचारी आयोग की सदस्य डॉ. लता।

उदयपुर. राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग की सदस्य डाॅ. लता महतो ने पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक में ताज्जुब जताया कि उदयपुर जिले के 43 पुलिस थानों में कहीं भी सफाई कर्मचारी नियुक्त नहीं हैं। पूछा कि थानों में सफाई कौन करता है तो एडिशनल एसपी अनंत कुमार का जवाब आया पुलिस विभाग में सफाई कर्मचारी नियुक्त नहीं हैं। बजट भी नहीं होने से पुलिसकर्मी ही मिलजुल कर सफाई करते हैं।

डाॅ. महतो ने एडिशनल एसपी से कहा कि जिस तरह थानों में लांगरी धोबी की पोस्ट होती है उसी तरह सफाई कर्मचारी भी होने चाहिए।

हर थाने में एक सफाईकर्मी नियुक्त करके इस काम को करने वाले बेरोजगार महिला-पुरूषों को रोजगार दिया जा सकता है।

अधिकारियों को ये निर्देश भी दिए

बगैर सैफ्टी किट पहनाए किसी सफाईकर्मी को सीवरेज लाइन या गटर में उतरने पर विवश करने वाले अधिकारी को पांच वर्ष कैद की सजा हो सकती है। कभी मजबूरी में किसी सफाईकर्मी को सीवरेज लाइन में उतारना हो तो वह प्लास्टिक का गाउन, गम बूट, हाथों में दस्ताने, नाक पर बायो मास्क, सिर पर हेलमेट तथा आंखों पर तैराकी वाला चश्मा पहने होना चाहिए।

नियमित स्वास्थ्य परीक्षण

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. संजीव टांक को निर्देश दिए कि सफाईकर्मियों का वर्ष में दो बार अनिवार्य रूप से स्वास्थ्य परीक्षण हो। हेपेटाइटिस बी की जांच आवश्यक रूप से होनी चाहिए। पढे-लिखे सफाई कर्मचारियों को एलडीसी बनाया जाना चाहिए। महिला सफाई कर्मियों को जमादार बनाएं। सप्ताह में एक दिन अवकाश अनिवार्य रूप से हो। इनके बच्चों के लिए समाज कल्याण अधिकारी को निर्देश दिए।

आयोग की सदस्य डाॅ. लता ने नगर निगम के आयुक्त हिम्मत सिंह बारहठ से कहा कि वे सफाई कर्मचारियों की शिकायत निवारण के लिए कमेटी का गठन करें। कमेटी में वाल्मीकि समाज के चार प्रतिनिधियों को वे खुद नियुक्त करेंगी। कमेटी को निगम परिसर में एक कमरा दिया जाए। सफाई कर्मचारियों को उनके घर के आसपास दो से तीन किलोमीटर क्षेत्र की बस्तियों-इलाकों में नियुक्त करें।